
शाहपुर – नितिश पठानियां
माटी का मोह ही है कि आपदा में सब कुछ खोने के बावजूद शाहपुर हलके के तहत रुलेहड़ पंचायत के लोग पैतृक भूमि छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रशासन इस क्षेत्र की भूमि को भवन निर्माण के लिए असुरक्षित घोषित कर चुका है और प्रभावितों को शाहपुर में सुरक्षित स्थान पर जमीन भी दी। लेकिन प्रभावितों ने शाहपुर जाने से इन्कार करते हुए गांव में ही भवनों का निर्माण कर लिया या कर रहे हैैं।
12 जुलाई को बीते वर्ष आज ही के दिन रुलेहड़ में त्रासदी आई थी। मलबे में में दबकर दस लोगों की जान चली गई थी। जिला कांगड़ा का बोह सहित सोहलदा, कोटला व त्रिलोकपुर क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं।
आज ही के दिन भागसू में पर्यटकों के वाहन बह गए थे। गज खड्ड का बहाव मुड़ने से राजोल बाजार व गांव खतरे में आ गया था।
कई परिवारों को मिले थे जख्म
पिछले साल 12 जुलाई को रुलेहड़ में भूस्खलन के कारण आशियानों के साथ दबने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। कई लोगों को सिर ढकने के लिए छत भी नहीं रही थी।
प्रशासन ने पीडि़त परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा और शाहपुर में घर बनाने के लिए छह-छह मरले जमीन भी दी थी। लेकिन एक भी परिवार रुलेहड़ से शिफ्ट होने के लिए तैयार नहीं हुआ।
भूस्खलन में इन 10 लोगों की गई थी जान
सुभाष चंद, दुर्गा प्रसाद, शिव प्रसाद, भीमसेन, मस्तो देवी, लांबी देवी, नसीब कुमार, कार्तिक कुमार, कंचना देवी, शकुंतला देवी।
एक सप्ताह चला था सर्च अभियान
रुलेहड़ में करीब एक सप्ताह मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए अभियान चला था। जिला प्रशासन को एनडीआरएफ व गृहरक्षकों की सेवाएं लेनी पड़ी थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी घटनास्थल का दौरा किया था।
कोई परिवार जाने को तैयार नहीं
रुलेहड़ पंचायत प्रधान आशा देवी का कहना है 12 जुलाई को रुलेहड़ पंचायत के वार्ड पांच में भूस्खलन से मकानों के साथ लोग मलबे में दफन हो गए थे।
सरकार ने पीडि़त परिवारों को मुआवजे के साथ-साथ मकान बनाने के लिए छह-छह मरले जमीन अलाट की थी, लेकिन कोई भी परिवार जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। मुआवजा राशि से लोग अब रुलेहड़ में ही मकान बना रहे हैं।
क्या कहते हैं डीसी
उपायुक्त जिला कांगड़ा डाक्टर निपुण जिंदल का कहना है 12 जुलाई, 2021 को हुई त्रासदी के संबंध में पीडि़त परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की है। साथ ही छह-छह मरले जमीन भी अलाट की थी लेकिन लोग इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुए।
संवेदनशील है बोह घाटी की भूमि
भूगर्भ विज्ञानी डा. अंबरीश महाजन का कहना है भूस्खलन की दृष्टि से बोह घाटी अति संवेदनशील है। यहां की जमीन दलदली है और मिट्टी रेतीली है। यहां दो मंजिल से अधिक मकानों का निर्माण करना उचित नहीं है। निर्माण विज्ञानी तरीके से ही किया जाना चाहिए।
मैंने इस क्षेत्र पर शोध किया है और बोह घाटी, सोहलदा, कोटला व त्रिलोकपुर काफी संवेदनशील पाए हैं। सुझावों की सूची जिला प्रशासन को सौंपी थी।
