करवाचौथ 2024 : करवाचौथ पर बन रहा व्यतीपात योग

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20 अक्तूबर को महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रहेंगी भूखी-प्यासी

आचार्य अमित कुमार शर्मा

इस बार करवाचौथ पर व्यतीपात योग बन रहा है। इस योग में पूजा करने से सुखी परिवार का आशीर्वाद मिलता है। हिंदू धर्म में करवाचौथ व्रत का विशेष महत्त्व है तथा सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ व्रत रखती हैं। अब इस व्रत को कुवांरी लड़कियां भी रखती हैं जो कि तारों की छांव में अपना व्रत खोलती है।

करवाचौथ व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। करवाचौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक दिन होते हैं। चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। विवाहित महिलाएं करवाचौथ के दिन भगवान शिव, माता पार्वती व भगवान गणेश की पूजा करती हैं। व्रत को चंद्रमा के दर्शन और अघ्र्य देने के बाद खोलती हैं।

करवाचौथ का व्रत कठिन व्रतों में से एक होता है इसे बिना अन्न व जल ग्रहण किए बिना रात में चंद्रमा के दर्शन तक किया जाता है। बता दें कि चतुर्थी तिथि 20 अक्तूबर को सुबह छह बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होगी और 21 अक्तूबर को सुबह चार बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। करवाचौथ का व्रत 20 अक्तूबर रविवार को रखा जाएगा।

पूजा विधि

करवाचौथ के दिन सुबह ही स्नान कर लें। फिर मुहूर्त के अनुसार करवाचौथ व्रत की कथा सुनें। इसके बाद सभी बड़ों के पैर छुएं और आशीर्वाद प्राप्त करें। अब शाम की पूजा के लिए थाली में फूल, धूप-दीप, रोली, मिठाई और पानी का लोटा रख लें। इस दौरान करवा में चावल भरकर उसे दक्षिणा के रूप में रख दें।

आप अपने रिवाजों के आधार पर अन्य दान के सामानों को भी रख सकते हैं। इसके बाद चांद निकलने के बाद चंद्रमा को अघ्र्य दें। अब छलनी की सतह पर जलता हुआ दीया रखें और चंद्र दर्शन करें। बाद में इसी छन्नी से पति का मुख देखें। फिर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण करें। इस दौरान सभी बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें। आप करवा को सास या किसी सुहागिन स्त्री को दे दें और उनके पैर छू लें।

चांद निकलने का समय

करवाचौथ के दिन चांद के भी नखरे बढ़ जाते हैं। इस बार प्रदेश में शाम सात बजकर 54 मिनट पर चांद निकलेगा।

पूजन का शुभ मुहूर्त

करवाचौथ पूजन का शुभ मुहूर्त शाम पांच बजकर 45 मिनट से शाम सात बजकर दस मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि एक घंटा 16 मिनट है।

नहीं होंगे व्रत उद्यापन

इस बार चतुर्थी तिथि क्षय होने के कारण व्रत उद्यापन नहीं होंगे। चतुर्थी तिथि क्षय होना शुभ नहीं माना जाता है।

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