उपमंडलाधिकारी बल्ह को बगला के पेट्रोल पंप और जमीन का कब्जा लेने के आदेश

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मंडी – डॉली चौहान

हिमाचल प्रदेश मुजारा एवं भू सुधार अधिनियम की धारा 118 की अवहेलना का मामला साबित होने पर उपायुक्त अरिन्दम चौधरी के न्यायलय ने बल्ह क्षेत्र के बगला (दौहंदी) स्थित पेट्रोल पंप की भूमि और वहां निर्मित भवन को प्रदेश सरकार के नाम पर करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने इस भूमि के इंतकाल को खारिज करके इसका इन्द्राज प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग के नाम पर करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने अपने आदेश में बल्ह के उपमंडलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से भूमि और इस पर बने भवन का कब्जा लेकर मकान में मिली हर वस्तु की एक सूची बनाने के लिए कहा है।

इस भूमि और भवन का कब्जा लेने के कार्य के लिए उन्हें पुलिस की सहायता लेने के लिए कहा गया है। अदालत ने फैसले की प्रति को बल्ह के एसडीएम और तहसीलदार को आवश्यक कार्यवाई हेतु प्रेषित किया है।

अदालत ने इस मामले के निष्कर्ष पर पहुंचते हुए अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादी राजेश कुमार पुत्र नंद लाल आरोड़ा और राजेश की माता पुष्पा रानी गैरकृषक हैं और वह किसी तरह से अपने नाम पर हिमाचल प्रदेश मुजारा एवं भू सुधार अधिनियम की धारा 118 की अनुमति के बगैर हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने के हकदार नहीं हैं।

लेकिन प्रतिवादियों ने गैर हिमाचली और गैर कृषक होने के तथ्य को छुपा कर मंडी जिला में जमीन की खरीद की है। प्रतिवादियों ने 1994 में दौहंदी मुहाल में विभिन्न भूमि मालिकों से 11 बिस्वे 19 बिस्वांसी, तीन-तीन बिस्वा और साल 1996 में 17 बिस्वा जमीन प्रावधानों की अवहेलना करके हासिल की थी।

जिसके चलते अदालत ने इन सभी जमीनों के इंतकाल खारिज करने और इन जमीनों के इन्द्राज प्रदेश सरकार के नाम पर करने के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो ने नंद लाल आरोड़ा, राजेश कुमार तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ धारा 118 की अवहेलना करके भूमि खऱीदने की एक शिकायत उपायुक्त कार्यालय को प्रेषित की थी।

जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की थी। अदालत में प्रतिवादियों की ओर से यह कहना था कि वह धारा 118 के प्रावधानों के बारे में अनभिज्ञ थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नंद लाल ने 1981 में जिला सोलन के उपायुक्त को 118 के तहत अनुमति के लिए दी गई अर्जी में यह स्वीकार किया था कि वह गैर हिमाचली हैं।

उन्होंने इसी आधार पर सोलन में जमीन खरीदी थी।। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें इन प्रावधानों की जानकारी नहीं थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सोलन में कृषि प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था जो कानून का जानबूझ कर सरासर उल्लंघन था।

धारा 118 की अनुमति के तहत जमीन प्राप्त करने से गैर कृषक ही रहता है उसे कृषक प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता। लेकिन प्रतिवादियों ने मंडी जिला में जमीन खरीदते समय गैर हिमाचली और गैर कृषक होने के तथ्य को छिपा कर जमीन प्राप्त की है। ऐसे में अदालत ने उपमंडलाधिकारी को इस जमीन और वहां पर बने भवन को अपने कब्जे में लेने का आदेश पारित किया है।

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