
ज्वाली – अनिल छांगु
नियमों की अवहेलना करके बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली स्कूल बसों व स्कूल संचालकों की अब खैर नहीं। सुप्रीम कोर्ट व जिलाधीश कांगड़ा के निर्देशानुसार स्कूली बसों पर प्रशासनिक स्तर पर लगाम कसी गई है।
मंगलवार को इसी के तहत उपमंडलाधिकारी ज्वाली महेंद्र प्रताप सिंह ने नाका लगाकर विभिन्न निजी स्कूलों की बसों की चैकिंग की तथा उनके दस्तावेजों की जांच की। अधिकतर बसों में अनियमितताएं पाई गईं जिसके बारे में बस चालकों को निर्देश दिए गए।
कई स्कूली बसों में जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, फ़सर्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र नहीं पाए गए तथा कई बसों में चालक बिना यूनिफार्म, बिना ड्राइविंग लाइसेंस पाए गए जबकि प्रशिक्षित परिचालक तो बसों में नहीं मिला।
एसडीएम ज्वाली महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गाइडलाइन अनुसार स्कूली बसों में जीपीएस सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, फ़सर्ट एड बॉक्स होना अनिवार्य है तथा बस में वैद्य लाइसेंसधारक चालक-परिचालक होना चाहिए। बस में जो बच्चे आते-जाते हैं, उनका रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके अलावा बसों में सीटों की क्षमता अनुसार ही बच्चे बैठे होने चाहिए।
स्कूली बच्चों को घर से स्कूल लाने व स्कूल से घर छोड़ने वाला निजी वाहन नहीं होना चाहिए। स्कूल बसों की फिटनेस व सर्विस समय पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूली बसों की दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
उन्होंने स्कूल संचालकों को भी निर्देश दिया है कि स्कूल वाहन में कोई कमी नहीं होनी चाहिए तथा निजी स्कूल बसों की दोबारा चैकिंग की जाएगी जिसमें अगर किसी बस में कोई कमी पाई गई तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।
