
ब्यूरो – रिपोर्ट
सरकार समाज के गरीब, असहाय व उपेक्षित वर्ग के लोगों के हितों की ओर किस प्रकार गंभीर है, इसका जीता जागता उदारण आनी उपमण्डल मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर पहले दोगरी मोड़ के समीप प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। जहां एससी व एसटी से संबंधित करीब 12 परिवार आज आजादी के 75 वर्ष बीत जाने पर भी झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने को विवश हैं।
दीपक तले अंधेरा वाली कहावत इन उपेक्षित परिवारों के लिए बिल्कुल सटीक बैठती है, क्योंकि आनी में आज जहां हर तरफ विकास नजर आ रहा और लोग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं, वहीं आनी विकास खंड की बिनन पंचायत के वार्ड दोघरी के गांव दोगरी मोड़ व सेरीवील के 12 परिवार, सरकार की योजनाओं से अछूते रह कर झुग्गी-झोपडिय़ों की ओट में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को विवश हैं।
गांव की अनुसूचित जाति वर्ग से संबंध खने वाली 80 वर्षीय बेसहारा वृद्धा केसरी देवी ने लडख़ड़ाती जुवां से बताया कि उसके जीने का कोई भी सहारा नहीं है। वह अपनी टूटी-फूटी वीरान झोंपड़ी में पालतू कुत्तों के सहारे अपने जीवन की गाड़ी को आगे धकेल रही है।
आईआरडीपी में होने के बावजूद सरकार व विभाग द्वारा उसके लिए न तो बिजली पानी की कोई सुविधा दी गई है और न ही गृहिणी सुविधा योजना, पक्के रास्ते, आवास योजना तथा आयुष्मान कार्ड की कोई सुविधा है। सरकार द्वारा हालांकि अब बुढ़ापा पेंशन को 17 सौ प्रति माह किया गया है, मगर केसरी देवी 80 वर्ष की आयु में भी मात्र एक हजार रुपए की विधवा पेंशन का सहारा लेकर बेहद दयनीय व कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन की गाड़ी को आगे धकेल रही है।
यही हाल गांव की 55 वर्षीय एससी वर्ग की महिला कृष्णा देवी का भी है, जो अपनी कच्ची झोंपड़ी में बिना किसी सरकारी सुविधा के अपना जीवन यापन करने को मजबूर है। कृष्णा देवी के घर न तो बिजली है और न ही हर घर नल से जल। इतना ही नहीं मात्र आधा बीघा भूमि में अपना जीवन बसर करने बाली अति निर्धन कृष्णा देवी को अभी तक न न तो आईआरडीपी और न गृहणी सुविधा व स्वास्थ्य कार्ड का कोई लाभ मिला है।
अपने घर तक जाने के लिए उसे सही रास्ते के अभाव में नाले होकर फिसलन व जोखिम भरे उबड़ खाबड़ संकरे मार्ग से आना जाना पड़ता है। इस अभागी महिला की पुकार आज तक न तो स्थानीय पंचायत के पदाधिकारियों ने सुनी और न ही यहां के नेताओं व विधायक महोदय तथा सरकारी महकमों के अधिकारियों ने कोई गौर किया।
अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत गुज्जर बस्ती में रहने बाले दोगरी मोड़ निवासी 30 वर्षीय रियाज सेरीवील निवासी 60 वर्षीय विधवा हीरा देवी, 50 वर्षीय सीताराम, रक्षा देवी, रमिला देवी, कांता देवी, पिंकी देवी व सूरता देवी का भी है, जो अनूसूचित जाति वर्ग की श्रेणी में होने के बावजूद अभी सरकारी सुविधाओं से पूरी तरह उपेक्षित हैं।
एक मंजिला पत्थर टीन पोष कच्चे झोंपड़ीनुमा मकानों में रहने बाले इन ग्रामीणों के घरों तक न तो पक्के रास्ते व सडक़ हैं, न इन लोगों को आवास योजना, गृहणी सुविधा तथा हैल्थ कार्ड और हर घर नल से जल का लाभ मिला है। इन लोगों के लिए सरकारी सुविधाएं अभी तक सपना मात्र ही हैं।
हमारा देश आज जहां आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने और हिमाचल प्रदेश अपने अस्तित्व के 75 वर्ष की पूर्णता पर अमृत महोत्सव मना रहा है। वहीं आनी क्षेत्र की बिनन पंचायत के दोघरी बार्ड के गांव दोगरी मोड़ व सेरीवील में अनुसूचित जाति व अनूसूचित जनजाति से संबंध रखने वाले करीब एक दर्जन परिवार सरकारी उपेक्षा के चलते आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
