
व्यूरो रिपोर्ट
अपने कृत्य को छिपाने के लिए एक मां ने जन्म देते ही ममता का गला घोंट दिया। उसका साथ भी तीन महिलाओं ने ही दिया। अपना कृत्य छिपाने के लिए नवजात की जान ले ली गई। बच्चे की किलकारियां किसी को सुनाई न दें, इसके लिए उसे पानी की कैनी में डाल दिया।
ऐसा करती बार न मां का दिल पसीजा और न उसके स्वजन का। अस्पताल में आया हर व्यक्ति इस कृत्य को सुनकर हैरान था। लोग प्रशासन को कोस रहे थे कि यदि अस्पताल में पालना शिशु केंद्र का सूचना पट्ट लगा होता तो शायद नवजात बच जाता।
इससे पूर्व मंडी में ही नाले में दो बच्चियों को फेंक दिया गया था। हैरत यह है कि इस मामले के बाद भी अस्पताल में पालना शिशु केंद्र का सूचना पट्ट नहीं लगा।
रविवार रात जोनल अस्पताल मंडी में एक नाबालिग के साथ तीन महिलाएं आई थीं। इनमें से नाबालिग ने एसआरएल लैब में टेस्ट करवाया था। उसके बाद वह शौचालय में चली गर्ई और थोड़ी देर के बाद बाहर आई। अंदेशा है कि बच्चे का जन्म शौचालय में ही न हुआ हो। यहीं पर ममता का गला घोंटा गया और बच्चे को कैनी में डाल खिड़की पर रखकर सफाई की गई होगी।
अहम सवाल यह है कि महिलाएं इतने बड़े घटनाक्रम के बाद अस्पताल से चुपचाप निकल गईं लेकिन न तो एसआरएल लैब के कर्मचारियों को पता चला और न ही अस्पताल की सुरक्षा कर्मियों को। अगर पालना शिशु केंद्र की सूचना अस्पताल के मुख्यद्वारों पर होती तो नन्हीं जान बच जाती। अस्पताल प्रशासन ने पूर्व में नाले में फेंकी गई बच्चियों के मामले से सबक नहीं सीखा।
यह कारण रहा कि एक नजवात इस लापरवाही का शिकार हो गया। पुलिस भी अभी तक अस्पताल में ही प्रसव होने की बात कह रही है। अब आरोपितों की धरपकड़ के बाद ही इस कृत्य को क्यों अंजाम दिया गया, इसका पता चल पाएगा।
मंडी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. धर्मपाल सिंह का कहना है अस्पताल के पालना शिशु केंद्र के संबंध में मुख्य द्वारों सहित अस्पताल के अन्य स्थानों पर भी सूचना पट्ट लगाए जाएंगे।
