
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक खास उपग्रह लांच करने जा रहा है। इस उपग्रह की कई खूबियां हैं। देश भर के सरकारी स्कूलों 750 छात्राओं ने इस उपग्रह को बनाया है। आजादी सेट (Azadi SAT-2) नामक उपग्रह की लॉन्चिंग पहले भी निर्धारित हुई थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था।
स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV D2 ) की दूसरी विकासात्मक उड़ान (Developmental Flight) 10 फरवरी, 2023 को सुबह 09:18 बजे श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड (launching pad) से निर्धारित है। 15 मिनट की उड़ान में ये 450 किमी की गोलाकार कक्षा में इंजेक्ट होगा।
दरअसल, आधुनिक तकनीक से लैस सेटेलाइट जब अंतरिक्ष में पहुंचने के सात दिन बाद इसमें “अंतरिक्ष गीत” बजेगा। अंतरिक्ष गीत देवी श्री प्रसाद (डीएसपी) ने गाया है, साथ ही म्यूजिक भी दिया है ,गीत को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में प्रदेश निर्माता डॉ वाईएस परमार की जन्मस्थली चन्हालग से संबंध रखने वाले “रमन रघुवंशी” द्वारा लिखा गया है।
SSLV D2यह गीत अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का सपना देखने वाले छात्रों को प्रेरित करेगा। साथ ही आशा का गीत भी होगा। यह एक ऐसा गीत भी है, जो एक गांव की लड़की सपने में अंतरिक्ष तक की यात्रा को दर्शाता है। फ़िलहाल गीत के बोल शेयर नहीं किये जा सकते है। बता दे कि देवी श्री प्रसाद ने मशहूर तेलगु फिल्म “पुष्पा” फिल्म के गाने “श्रीवल्ली” के म्यूजिक डायरेक्टर भी है।
गौरतलब है कि सिरमौर के रहने वाले “रमन रघुवंशी” करीब 6 साल से माया नगरी मुंबई में सेटल है। इस प्रोजेक्ट के अलावा भी रमन ने कई महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर कार्य किया है। उल्लेखनीय है कि यह उपग्रह G 20 के का लोगो भी अंतरिक्ष में लेकर जा रहा है, क्योंकि इस साल जी-20 की अध्यक्षता भी भारत कर रहा है।
रमन रघुवंशी ने कहा कि वह इस सेटेलाइट की लॉन्चिंग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि चंद रोज में ही गीत लिखा था। गीत को दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री में एक नामी गायक देवी श्री प्रसाद द्वारा गाया गया है। इसके अलावा म्यूजिक भी दिया गया है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में स्थापित होने के बाद गीत बजेगा। उन्होंने बताया कि पहले उपग्रहों में देशों के राष्ट्रीय गीत तो बजे है लेकिन विशेष गीत पहली बार बजेगा।
ये है प्रोजेक्ट की खास बातें..
- स्पेस किड्ज इंडिया (Space Kids India) भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप है, जो छोटे उपग्रहों, अंतरिक्ष यानों और ग्राउंड सिस्टम के डिजाइन, निर्माण और प्रक्षेपण में अग्रणी है। स्टार्टअप का लक्ष्य शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग (research and industry) की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष तक किफायती और टिकाऊ पहुंच प्रदान करना है।
- परियोजना की परिकल्पना श्रीमती केसन द्वारा की गई थी। स्पेस किड्ज इंडिया ने बुनियादी और सरल प्रयोग विकसित किए हैं, जिन्हें छात्र विज्ञान शिक्षकों के साथ ऑनलाइन कोचिंग में सीख सकते हैं।
- परियोजना में चयनित गर्ल्स कक्षा 8वीं-12वीं की हैं। एसटीईएम में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘ महिलाओं की अवधारणा’ के साथ यह अपनी तरह का पहला अंतरिक्ष मिशन है, क्योंकि इस वर्ष की संयुक्त राष्ट्र की थीम “अंतरिक्ष में महिलाएं” है।
आजादी सेट-2 के मिशन के उद्देश्य
- लोरा और एमेच्योर रेडियो संचार (Lora and Amateur Radio Communications) क्षमताओं का प्रदर्शन करना।
- नए सॉलिड-स्टेट सेंसर का उपयोग करके अंतरिक्ष में विकिरण के स्तर को मापने के लिए।
- उपग्रह के अंदर स्थापित 75 छात्र प्रयोगों से तापमान, रीसेट गिनती आदि जैसे विभिन्न स्वास्थ्य डेटा और आईएमयू डेटा को मापने के लिए।
- विस्तारणीय उपग्रह संरचना का प्रदर्शन करना।
पेलोड विवरण:
- लोरा ट्रांसमीटर
- सॉलिड-स्टेट रेडिएशन सेंसर
- 75 छात्र प्रयोग बोर्ड
विस्तार योग्य संरचना
एक बार जब यह कक्षा में पहुंच जाता है तो उपग्रह 8 गुना बड़ा हो जाता है, जो इसे स्थिर विन्यास में उत्पन्न होने वाली शक्ति से 4 गुना अधिक उत्पादन करने की क्षमता देता है।
