HRTC: व्यवस्था परिवर्तन या बढ़ा दी टेंशन

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मंडी – अजय सूर्या

यह डिजिटल ईरा है। आज आपकों कहीं शॉपिंग करनी हो या फिर सडक़ किनारे चाट पापड़ी खानी हो। आजकल हर जगह क्यूआर कोड से ही पेमेंट होती है, क्योंकि डिजिटल के इस दौर में हार्ड कैश कोई भी रखना पसंद नहीं करता।

बदलते वक्त की बदलती जरूरतों के हिसाब से हिमाचल की लाइफलाइन को भी इस डिजिटल ईरा के साथ जोडऩे की कोशिश की गई। यानी कि एचआरटीसी में कैशलेस भुगतान की व्यव्सथा। व्यव्सथा के लागू होने से अकसर कंडक्टर और सवारियों के बीच जो छुट्टे पैसों को लेकर किचकिच होती है, वह खत्म हो जाएगी।

निगम ने कुछ महीने पहले ही बड़ा कदम उठाया और कैशलेस सिस्टम की ओर कदम बढ़ाया। कैशलेस भुगतान की सुविधा शुरू करने के लिए एचआरटीसी ने 4,500 एंड्रॉयड टिकटिंग मशीनें खरीदी हैं। ई-टिकटिंग मशीनों के जरिए यात्री यूपीआई के अलावा गूगल पे, पेटीएम, फोन पे या भीम ऐप से भी किराए का भुगतान कर सकते हैं, मगर शुरुआती समय में यह सिस्टम फिलहाल फेल होता हुआ नजर आ रहा है।

दरअसल खबर मंडी से सामने आई है, जहां पर मंडी डिपो के लिए आई नई टिकट मशीनों का कंडक्टरों ने विरोध किया है। कंडक्टरों का कहना है कि इन मशीनों में ऑनलाइन कैशलेस की सुविधा है,  लेकिन यह मशीन कंडक्टरों के लिए सिरदर्द बन गई है।

कंडक्टर यूनियन प्रधान रूपलाल नेगी और अन्य कंडक्टरों के बोल

कंडक्टर यूनियन के प्रधान रूपलाल नेगी और अन्य कंडक्टरों ने बताया कि इन मशीनों के माध्यम से टिकट बनाने में 4 से 5 मिनट लग जाते हैं। मशीनों में बैटरी बैकअप भी बहुत कम है। लंबे रूटों की बसों में ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चार्जिंग न होने के कारण मशीन भी बंद पड़ जाती है।

कंडक्टरों ने कहा कि स्लो प्रोसेसिंग और बहुत से ऑप्शन होने के कारण टिकट काटने में देरी हो रही है। साथ ही कॉलेज पास, हैंडिकैप्ड और अन्य पास के टिकट काटने की सुविधा इस मशीन में नहीं है। कंडक्टरों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में भी राजस्थान की तर्ज पर टिकट मशीन लाई जाए।

भविष्य के लिए बेहतर

एचआरटीसी में डिजिटल व्यवस्था बेशक कंडक्टरों के लिए परेशानी का सबब हो, लेकिन यह व्यवस्था घाटे में चल रहे निगम के लिए भविष्य में लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इसका एक लाभ तो यह होगा कि टांका मास्टर कंडक्टरों के हाथ बंध जाएंगे। पूरी पारदर्शिता होगी। एक दिन में कितना किराया आया, सब एचआरटीसी के खाते में जाएगा।

बेशक एक दिकट काटने में अभी चार या पांच मिनट लग रहे हैं, लेकिन जब हाई स्पीड की मशीनें आ जाएंगी, तो वक्त का बचाव होगा और कंडक्टर खुद इसकी तारीफ करेंगे। क्योंकि किसी भी चीज को अपनाने में थोड़ा वक्त लगता है और धीरे-धीरे इसकी आदत बन जाएगी।

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