
कांगड़ा – राजीव जसवाल
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। परंतु फिर भी कुछ ऐसी प्रस्तावित योजनाएं हैं जो कई वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही है ।अब इसमें विभाग की अनदेखी कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। सवाल तो यह उठता है कि फाइल आगे सरकी क्यों नहीं।
ऐसा ही कुछ आदि हिमानी चामुंडा मंदिर को 2017–18 के दौरान वन विभाग द्वारा करीब 25 कनाल भूमि का हस्तांतरण किया था । चार साल बीत चुके उस भूमि की फाइल राजस्व विभाग के पास अटकी पड़ी है । हैरानी तो इस बात की है कि आज दाखिला खारिज तो क्या इंतकाल तक नहीं हो पाया ।
हालांकि इस जमीन पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है। आदि हिमानी चामुंडा मंदिर के नाम अपनी कुल आठ मरले जमीन ही है बाकि सब भूमि वन विभाग के नाम पर है। वन विभाग द्वारा प्रद्धत जमीन को मंदिर के नाम अभी न करवाना प्रशासन की सरासर एक बड़ी भूल है ।
यहां पर यह बनने थे विश्राम गृह
यहां पर आदि हिमानी चामुंडा परिसर में सराए बनाए जाने की योजना है। यहां पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच बनने थे। यात्रियों के विश्राम के लिए छोटे-छोटे हट्स बनने थे।
मंदिर न्यास सदस्यों ने यह कहा
मंदिर न्यास सदस्य मनू सूद ने कहा कि इस संबंध में मदिर न्यास बैठक में कई बार मुद्दे को उठाया गया है ।अब आने वाली बैठक में सहायक मंदिर आयुक्त के समक्ष इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा कर मसले को हल करने का विकल्प तलाशा जाएगा।
समाज सेवी वीना रैणा ने कहा कि हिमानी चामुंडा मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्रस्तावित सभी योजनाओं को सिरे चढ़ाने की जरूरत है । मंदिर का राजस्व बढे़गा ओर श्रद्धालुओं को नजदीक से धौलाधार पर्वत श्रृंखला के दीदार होंगे।
सुरेंद्र राणा ने कहा कि हिमानी चामुंड़ा मंदिर एक धार्मिक सिद्धपीठ है । इसे यदि वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जाए तो भारत में ही नहीं विदेशों के पर्यटक भी आ सकेंगे ।
यह बोली शिल्पी वैक्टी एसडीएम
एसडीएम, सहायक मंदिर आयुक्त शिल्पी वैक्टा ने कहा कि प्रस्तावित भूमि की प्रोपोजल दोबारा से बनाई जाएगी । शीघ्र ही भूमि मंदिर प्रशासन के नाम पर हो इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
