बाहरी राज्यों से लाकर हिमाचल में तूड़ी बेचने वाले ट्रक मालिकों की मनमानी हावी

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अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता तो पशुपालक अपने पशुओं को एसडीएम कार्यालय के बाहर बांध देंगे। 

ज्वाली- अनिल छांगू

हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी राज्यों से तूड़ी को ट्रकों में लादकर ला रहे पंजाब के ट्रक तूड़ी कम तोलकर पशुपालकों को बेच रहे हैं जिससे खुद तो चांदी कूट रहे हैं लेकिन पशुपालकों की जेबों पर डाका डाला जा रहा है। ओवरलोडिड ट्रक हिमाचल में आते हैं और हिमाचल के पशुपालकों को महंगे दाम पर तूड़ी बेचते हैं। इनके पास तूड़ी को तोलने का कोई यन्त्र भी नहीं होता है। तोल के नाम पर टोकरा व एक पल्ली होती है जिसके आधार पर तूड़ी बेचते हैं।

पशुपालकों को बताया जाता है कि टोकरा में 30 किलोग्राम तथा पल्ली में भी 30 किलोग्राम तूड़ी आती है। जिस हिसाब से प्रति क्विंटल तूड़ी लेने पर तीन पल्ली या टोकरे दिए जाते हैं। लेकिन बड़ी मुश्किल से यह तूड़ी 60 से 65 किलोग्राम निकलती है। जिससे प्रति क्विंटल में 30 से 35 किलोग्राम कम तोलकर चूना लगाया जाता है।

यह ट्रक वाले तूड़ी 1250 से 1450 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचते हैं। इन ट्रक वालों का भी कोई मूल्य निर्धारित नहीं है। इन तूड़ी बेचने वालों की मनमानी लगातार हावी है तथा सरकार सहित प्रशासन इनको पूछने की जहमत नहीं करता है। लोगों ने कहा कि अगर प्रशासन पशुपालकों के हित में तुड़ी का रेट फिक्स नहीं करता तो हम अपने पशुओं को एसडीएम कार्यालय के बाहर बांध देंगे। इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।

उन्होंने कहा की यह तूड़ी लदे ट्रक हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर सारी सड़क को कवर करके गुजरते हैं, क्योंकि इनके गुजरने के कारण पीछे चल रहे वाहन को आगे कुछ भी नहीं दिखता है। इनके पास कोई तोलने का भी यन्त्र नहीं होता है तथा अगर कोई पशुपालन अपने तोल यन्त्र से मापतोल करके तूड़ी लेना चाहता है तो उसको तूड़ी नहीं दी जाती है।

सुरेश गुलेरिया, संजीव कुमार, राज कुमार, संदीप सिंह, मलकियत सिंह, राजन इत्यादि ने कहा कि बाहरी राज्यों से तूड़ी लाकर बेचने वाले ट्रकों द्वारा बिना तोल यन्त्र के तूड़ी कम तोल कर बेची जाती है। क्विंटल तूड़ी के नाम पर मात्र 60 किलोग्राम तूड़ी ही दी जाती है और प्रति क्विंटल में 40 किलोग्राम का चूना लगा दिया जाता है। हर सड़क मार्ग से रोजाना 25 से 30 ट्रक तूड़ी के लदे हुए निकलते हैं।

कहीं भी पुलिस द्वारा इनको रोक कर पूछा नहीं जाता है। सुरक्षा के लिहाज से देखा जाए तो पड़ोसी राज्यों से कौन सा ट्रक तूड़ी में क्या छिपाकर हिमाचल ले आए, इसका इसका कोई अंदाजा नहीं कर सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर से मांग की है कि बाहरी राज्यों से तूड़ी लाकर बेच रहे ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई लाई जाए तथा इनको माप यन्त्र साथ रखने की भी हिदायत दी जाए ताकि उससे तोल कर तूड़ी ली जा सके।

यह है जिलाधीश कांगड़ा के बोल

इस संबंध में जिलाधीश कांगड़ा निपुण जिंदल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला मीडिया द्वारा हमारे ध्यान में लाया गया है और पशुपालकों के हित के लिए शीघ्र ही तुड़ी का रेट फिक्स किया जाएगा। जिससे पशुपालकों को ऐसी परेशानी ना झेलनी पड़े।

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