
धर्मशाला- राजीव जस्वाल
हिमाचल प्रदेश के आईटीआई दाड़ी (धर्मशाला) में इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल ट्रेड में चार छात्राएं करंट से खेल रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल ट्रेड में प्रवेश लेकर छात्राएं संस्थान में पढ़ रहे युवक छात्रों के साथ बिजली के उपकरण ठीक करने का प्रशिक्षण ले रही हैं। छात्राओं ने कुछ अलग कर दिखाने के जुनून के कारण पुरुष प्राथमिकता वाले इन ट्रेडों में प्रवेश लिया है।
जानकारी के अनुसार आईटीआई दाड़ी में इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल ट्रेड में इस वर्ष चार छात्राओं ने प्रवेश लिया है। चारों ही छात्राओं का अपने ट्रेड के प्रति रुझान काफी अच्छा है और ट्रेड के अन्य लड़कों के साथ बिजली के उपकरणों को ठीक करना और बनाना सीख रही हैं।
क्या कहती हैं प्रशिक्षण ले रहीं छात्राएं
रेलवे में जाने के शौक ने दिलाई एडमिशन : काजल
जिला ऊना से आईटीआई दाड़ी में इलेक्ट्रॉनिक्स मेकेनिकल का प्रशिक्षण ले रही काजल ने बताया कि उसका सपना रेलवे में जाने का है। इसके चलते ही उसने इस ट्रेड को चुना है। काजल ने बताया कि उसके परिवार के भी कई सदस्य रेलवे में नौकरी कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने उसे इस ट्रेड में प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया है।
कुछ नया करने के जनून से लिया प्रवेश : तनु
इलेक्ट्रॉनिक्स मेकेनिकल का प्रशिक्षण ले रहीं जदरांगल की रहने वाली तनु ने बताया कि उसे अपने जीवन में कुछ नया करना था, जिसके चलते उसने इस ट्रेड में प्रवेश लिया है। उसने बताया कि उनकी इंस्ट्रक्टर और साथ पढ़ने वाले छात्र उन्हें सिखाने में काफी मदद करते हैं।
करंट से नहीं लगता डर : अंकिता
आईटीआई दाड़ी में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रवेश लेने वाली अंकिता शर्मा ने बताया कि उसे बिजली के करंट से डर नहीं लगता। बिजली के उपकरणों के साथ खेलना उसे बहुत पसंद था, इसके चलते उसने इस ट्रेड में प्रवेश लिया है। उसने बताया कि वह प्रशिक्षण लेने के बाद इसे रोजगार के रूप में भी अपनाएंगी।
क्या कहते हैं इंस्ट्रक्टर
लड़कियों को सिखाने में नहीं आ रही कोई दिक्कत : कंचन, इलेक्ट्रॉनिक्स के ट्रेड की इंस्ट्रक्टर कंचन शुक्ला ने बताया कि लड़कियों को सिखाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही है। लड़कियां पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने ट्रेड से संबंधित कार्यों को कर रही हैं।
लड़कों की अपेक्षा लड़कियां जल्दी सीख रहीं काम : प्रवीन
वहीं इलेक्ट्रिकल ट्रेड का प्रशिक्षण दे रहे इंस्ट्रक्टर प्रवीन ने बताया कि उनके टेड़ में 18 के करीब लड़के हैं, जबकि दो लड़कियां भी बिजली के उपकरण ठीक करने और बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। लड़कियां लड़कों की अपेक्षा अधिक मेहनत कर रही हैं।
