
चुनावी साल में पालमपुर की जनता को सरकार से जिला का दर्जा मिलने की बंध गई उम्मीद
पालमपुर- बर्फू
नए साल और चुनावी वर्ष में पालमपुर की जनता को सरकार से जिला का दर्जा मिलने की आस है। लगभग छह दशक तक नगर परिषद रही पालमपुर को भाजपा ने 2021 में नगर निगम का दर्जा प्रदान किया था। भाजपा के नेता इसका पूरा श्रेय ले रहे थे कि कांग्रेस ने पालमपुर को जिला का दर्जा दिए जाने का मुद्दा गरमा दिया।
उधर, भाजपाइयों ने इसका काउंटर करते हुए कहा कि भाजपा ने नगर बनाया है, तो जिला की बात भी बन सकती है। मामला चुनावी वर्ष में राजनीतिक समीकरणों को बदलने का मादा रखते है। ऐसे में क्षेत्र की जनता को बरसों पुरानी मांग पूरा होने की आस बंध गई है।
पालमपुर को जिला का दर्जा दिए जाने की मांग काफी पुरानी है। इसके लिए कुछ वर्ष पूर्व प्रबुद्ध जनता ने प्रयास भी शुरू किए थे। पूर्व में भाजपा सरकार के समय में यह मांग सिरे चढ़ती भी दिखी, जब पालमपुर में जिला से संबंधित आला अधिकारी की तैनाती यहां की गई। हालांकि उसके बाद मामला राजनीति की भेंट चढ़ गया और ठंडे बस्ते में चला गया।
नगर निगम का दर्जा मिलने से खुश पालमपुर के लोग अब चुनावी बेला में जिला बनाए जाने को लेकर सरकार पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं। पूर्व में जब प्रदेश में जिले बनाए जाने को लेकर लोगों ने मांग उठाई थी, तब एक नेता अब बड़े ओहदे पर हैं और सबसे अहम यह कि कांग्रेस और भाजपा दोनों के ही नेता पालमपुर को जिला का दर्जा दिए जाने के पक्षधर हैं।
एमएलए आशीष बुटेल तो विधायक प्राथमिकता बैठक में भी पालमपुर को जिला का दर्जा प्रदान किए जाने की बात कर चुके हैं। चुनावी साल में सोशल नेटवर्क साइट्स पर तो यह मामला एक बार फिर गरमाने लगा है। जिला का दर्जा दिए जाने को लेकर पालमपुर तमाम मानकों पर खरा उतरता है तो चुनावी साल में दोनों दलों के नेता भी इसे एक बड़ा मुद्दा मान रहे हैं।
यह भी है तर्क
प्रदेश में इस समय पांच नगर निगम हैं। इनमें शिमला, सोलन और मंडी को जिला का दर्जा प्राप्त है और धर्मशाला जिला हैडक्र्वाटर है, जबकि पालमपुर को अभी उपमंडल का ही दर्जा है। इस आधार पर भी पालमपुर की जनता अपना पक्ष रख रही है और चुनावी साल में यह मांग पूरी किए जाने की आस लगाए हुए है।
