हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की पावन और ऐतिहासिक धरती परागपुर के समीप डांगरा गांव में स्थित बाबा सिद्ध चानो जी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि न्याय, विश्वास और सत्य का जीवंत केंद्र माना जाता है।
करीब 400 वर्ष प्राचीन यह दरबार उन असंख्य पीडि़तों के लिए आखिरी आस है, जिन्हें जीवन की न्याय-व्यवस्था से निराशा मिली हो। इसी अटूट विश्वास के कारण बाबा सिद्ध चानो जी को क्षेत्र में कलियुग के न्याय के देवता और ‘सच्ची सरकार’ की संज्ञा दी गई है।
जनश्रुतियों के अनुसार बाबा सिद्ध चानो जी एक महान सिद्ध पुरुष थे, जिन्होंने अपना समूचा जीवन तप, साधना और मानव सेवा में समर्पित कर दिया। वे सत्य और न्याय के ऐसे उपासक थे कि उनके पास आने वाला हर व्यक्ति निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद लेकर आता था।
कहा जाता है कि बाबा के जीवनकाल में ही उनके निर्णयों की ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी थी। किसी के साथ अन्याय हुआ हो, जमीन-जायदाद का विवाद हो या सामाजिक अपमान, बाबा के दरबार में सच्चाई के आधार पर फैसला होता था।
बाबा सिद्ध चानो जी के देवलोक गमन के बाद उनकी समाधि स्थल पर यह मंदिर स्थापित किया गया, जो कालांतर में आस्था का विशाल केंद्र बन गया। आज भी भक्तों का विश्वास है कि बाबा का दरबार जीवंत है और यहां बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के न्याय मिलता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा के सामने कोई झूठ टिक नहीं पाता और जो सच्चा होता है, वही विजयी होता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि यहां आने वाले श्रद्धालु केवल मन्नत नहीं मांगते, बल्कि अपने जीवन की पीड़ा, अपमान और संघर्ष की कहानी बाबा के चरणों में रखते हैं।
खासकर वे लोग, जिन्हें अदालतों, प्रशासन या समाज से न्याय नहीं मिल पाता, वे बाबा सिद्ध चानो जी को अंतिम सहारा मानते हैं। अनेक भक्त बताते हैं कि वर्षों से उलझे मामलों का समाधान बाबा की कृपा से सहज रूप से हुआ। मंगलवार और शनिवार को बाबा के दरबार में विशेष भीड़ उमड़ती है।
इन दिनों मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जाती हैं। हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं। भक्तजन नारियल, प्रसाद, लाल कपड़ा और धूप-दीप अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं रखते हैं।
मान्यता है कि यदि मनोकामना सच्ची और न्यायसंगत हो, तो बाबा अवश्य उसे पूर्ण करते हैं। मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत शांत, आध्यात्मिक और ऊर्जा से परिपूर्ण है। हरियाली से घिरे इस स्थल पर पहुंचते ही मन को एक अलग ही सुकून मिलता है। साधारण किंतु प्रभावशाली मंदिर संरचना बाबा की सादगी और तपस्वी जीवन की याद दिलाती है।
यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए भी आते हैं। परागपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान में बाबा सिद्ध चानो जी मंदिर का विशेष स्थान है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस दरबार से जुड़ी कथाएं और अनुभव सुनाए जाते रहे हैं, जिन्होंने इस आस्था को और मजबूत किया है।
आधुनिक युग में भी जब तकनीक और तर्क प्रधान हो चुके हैं, बाबा सिद्ध चानो जी का दरबार लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि सत्य और न्याय की शक्ति आज भी जीवित है। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा के नाम से क्षेत्र में आपसी सौहार्द और नैतिक मूल्यों को बल मिला है। विवादों को सुलझाने से पहले लोग आज भी बाबा का स्मरण करते हैं।
यह दरबार समाज को यह संदेश देता है कि अन्याय चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, अंतत: सत्य की ही विजय होती है। चार सदियों से बाबा सिद्ध चानो जी का दरबार बिना किसी दिखावे के न्याय का प्रतीक बना हुआ है।
बदलते समय के साथ भी यहां की आस्था, श्रद्धा और विश्वास अडिग है। यही कारण है कि आज भी बाबा सिद्ध चानो जी का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक ही भाव आता है यहां देर हो सकती है, लेकिन बाबा की सच्ची सरकार में अंधेर कभी नहीं होता।

