पठानकोट मंडी फोरलेन निर्माण कई घरों को लीलने के कगार पर

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गलत कटिंग बन रह भूस्खलन का कारण, 22मील खज्जियाँ में लगभग चार घर कभी भी हो सकते है जमींदोज, प्रभावितों का NHAI और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष, शासन प्रशासन का हर द्वार खटखटाने के बाद भी नहीं मिली राहत

नूरपुर – स्वर्ण राणा

पठानकोट मंडी फोरलेन का निर्माण पिछले तीन वर्षों से ज्यादा समय से चल रहा है।देर सवेर इसका निर्माण कार्य भी पूरा हो जाएगा। इस फोरलेन बनने से निश्चित रूप से यातायात सुगम हो जाएगा। यह विकास का एक रूप है लेकिन इसी विकास के पीछे इसका दूसरा पहलू है जिससे अमूमन आम जनता अनभिज्ञ है। इस फोरलेन निर्माण से कई घर उजड़ने वाले है।

निर्माणकार्य की गलत कटिंग इस बरसात में भूस्खलन के कारण कई घरों को लीलने को तैयार है। वैसे तो समस्या नूरपुर, भड़वार, जोंटा क्षेत्रों में भी है लेकिन 22मील के खज्जियाँ में स्थिति और भयानक नजर आ रही है जहां लगभग चार घर पूरी तरह खतरे के मुहाने पर है।

प्रभावित नरेंद्र सिंह के बोल

प्रभावित नरेंद्र सिंह ने बताया कि तीन साल से फोरलेन का निर्माण कार्य चला हुआ है और उनके घर के सामने से ही इस सडकमार्क का निर्माण हो रहा है लेकिन जिस प्रकार से निर्माण कम्पनी ने बेतरतीब ढंग से कटिंग की उससे आज उनके घर पूरी तरह खतरे की जद में है।

इनकी माने तो इस खतरे को लेकर उन्होंने प्रशासन के साथ साथ NHAI, IRB कम्पनी के साथ हर चौखट पर माथा रगड़ा लेकिन उनकी समस्या को लेकर किसी ने भी संजीदगी नहीं दिखाई और आज स्थिति जहां तक पहुंच गई है कि पूरी जिंदगी की कमाई अपने घरों पर लगाने वाले परिवार आंखों के सामने अपने घरों को मिट्टी में मिलता है देखने को मजबूर है।

वहीं NHAI द्वारा जिस प्रकार से रिटेलिंग वॉल लगाई गई है वो देखने ने ही हास्यपद लगती है क्योंकि भूस्खलन से पांच से सात मीटर की दूरी पर इसको लगाया जा रहा है और बीच की जगह खाली है इससे इस रिटेलिंग वॉल का कोई औचित्य नहीं दिखता।

मेजर टेक्नीशियन तुषार के बोल

मौके पर पहुंचे NHAI के मेजर टेक्नीशियन तुषार ने बताया कि इस समय बारिश का समय है और फिलहाल स्लाइडिंग जोन में क्रेटवाल लगाने की जल्द शुरुआत कर दी जाएगी।अब यह क्रेटवाल मात्र वक्तव्य में ही दिखेगी या फिर धरातल पर कोई काम होगा वो भविष्य ही बताएगा लेकिन जिस प्रकार पूरी पूरी रात यह परिवार जाग जाग कर रात गुजार रहे है वो वाकई में ही चिंता का विषय है और चैन की नींद सोने वाले शासन प्रशासन को जरूर गंभीरता से इस पर सोचना होगा।

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