मुख्यमंत्री सुक्खू की कन्यादान योजना ने निभाया पिता का फर्ज, बेटियों का हुआ सम्मानजनक विवाह

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे

पांवटा साहिब निवासी तारो देवी ने बताया कि उनके पति के भाई और भाभी का निधन लगभग 15-18 वर्ष पहले बीमारी के कारण हो गया था। पीछे दो बेटियाँ और एक बेटा रह गए थे, जिनका पालन-पोषण उन्होंने अपने बच्चों की तरह किया। सीमित आय, थोड़ी-सी जमीन और खेती पर आधारित जीवन में बेटियों की शादी करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था।

सरकारी योजना बनी संबल

जब बेटियाँ विवाह योग्य आयु में पहुंचीं तो आर्थिक तंगी उनके विवाह में सबसे बड़ी बाधा बनी रही। इस दौरान तारो देवी को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत राज्य सरकार द्वारा बेटियों के विवाह के लिए प्रत्येक को ₹51,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।

योजना के तहत मिला वित्तीय सहयोग….

तारो देवी ने बाल विकास परियोजना अधिकारी, पांवटा साहिब के कार्यालय में जाकर योजना की जानकारी ली और निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन किया। सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करवाने के बाद, उन्हें दोनों बेटियों के विवाह के लिए कुल ₹1,02,000 (51-51 हजार रुपये) की सहायता राशि प्राप्त हुई।

सपना हुआ साकार, बेटियों की शादी हुई धूमधाम से…

सरकारी सहायता से तारो देवी की बेटियाँ खुशी-खुशी विवाह बंधन में बंध सकीं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ने उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता को दूर किया और बेटियों की शादी अच्छे से हो सकी। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू और सरकार का आभार व्यक्त किया।

योजना की पात्रता व आवेदन प्रक्रिया….

बाल विकास परियोजना अधिकारी गीता सिंगटा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत वे परिवार पात्र हैं जिनकी वार्षिक आय ₹50,000 तक हो। साथ ही विधवाओं की बेटियाँ, अनाथ लड़कियां और नारी सेवा सदनों में रहने वाली बालिकाएं भी योजना का लाभ उठा सकती हैं।

आवेदन बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाइज़र के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र पर किया जा सकता है। सत्यापन के बाद सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

सशक्त हिमाचल की दिशा में एक सशक्त कदम…

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, प्रदेश सरकार की उन महत्वपूर्ण पहलों में से है जो समाज के जरूरतमंद वर्ग की बेटियों को सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर कर रही हैं। यह योजना न केवल बेटियों के विवाह को आसान बना रही है, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त हिमाचल के निर्माण में भी योगदान दे रही है।

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