सोलन में सिरमौर का गौरवशाली HAS दंपती: एक SDM कंडाघाट, तो एक AC to DC

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हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश के सोलन जनपद में एक प्रशासनिक दंपती सेवारत है। यह दंपती न केवल अपने-अपने प्रशासनिक दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन कर रहा है, बल्कि परिवार और समाज के प्रति भी समर्पित भाव से जुटा हुआ है।

यह कहानी, हिमाचल प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गोपाल चंद शर्मा और उनकी धर्मपत्नी नीरजा शर्मा की है। वर्तमान में गोपाल चंद शर्मा एसडीएम कंडाघाट के पद पर कार्यरत हैं, जबकि नीरजा शर्मा एसी टू डीसी, सोलन के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

दिनभर प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त यह दंपती शाम होते ही एक 9 वर्षीय बेटे और 4 साल की बेटी के माता-पिता की भूमिका निभाता है। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और संतुलन की ऐसी मिसाल है, जहां ऑफिस और घर दोनों को पूरी ईमानदारी से निभाया जा रहा है।

सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के गत्ताधार गांव से संबंध रखने वाले गोपाल चंद शर्मा ने बेहद साधारण परिस्थितियों में अपनी यात्रा शुरू की। शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाहन से विज्ञान संकाय में जमा दो और फिर नाहन कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक की पढ़ाई की।

परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर था और माता-पिता के लिए सात बच्चों की परवरिश करना किसी तप से कम नहीं था। वर्ष 2006 से 2009 तक वे हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक में कार्यरत रहे, इसके बाद हाईकोर्ट में क्लर्क नियुक्त हुए और साथ ही टीजीटी (TGT) परीक्षा भी उत्तीर्ण की। लेकिन लक्ष्य कुछ और था।

2013 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा की एलाइड सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और आबकारी व कराधान अधिकारी (ETO) बने। इसके नौ साल बाद, 2022 में वे हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा अधिकारी (HAS Officer) प्रोमोट हुए।

पहली नियुक्ति आरटीओ (Regional Transport Officer) सोलन के पद पर हुई, इसके बाद वे एसी टू डीसी शिमला तैनात रहे। वर्तमान में एसडीएम कंडाघाट के पद पर कार्यरत हैं।

वहीं, उनकी पत्नी नीरजा शर्मा मूल रूप से बिलासपुर जिला की घुमारवीं तहसील के हटवाड़ गांव से ताल्लुक रखती है। उन्होंने बीएससी और एमएससी (B.Sc & M.Sc in Biotechnology) की पढ़ाई शूलिनी यूनिवर्सिटी, सोलन से की है।

कॉर्पोरेट क्षेत्र की चकाचौंध से प्रभावित होने के बावजूद उनका मन सेवा के क्षेत्र में था। 2013 में उन्होंने एलाइड सर्विसेज परीक्षा पास कर तहसीलदार के रूप में पहली पोस्टिंग बलद्वाड़ा, मंडी में पाई।

2022 में वे जिला राजस्व अधिकारी बनीं। 2023 में उनका प्रमोशन एचएएस अधिकारी के रूप में हुआ। वर्तमान में वे एसी टू डीसी सोलन के रूप में कार्यरत हैं।

दोनों की पहली मुलाकात हिप्पा (HIPA) शिमला में प्रशिक्षण के दौरान हुई। प्रशिक्षण के दौरान मित्रता गहराई और वर्ष 2015 में यह संबंध विवाह में परिणत हो गया।

उस समय गोपाल शर्मा ईटीओ, जबकि नीरजा शर्मा तहसीलदार के पद पर सेवारत थीं। आज दोनों प्रशासनिक सेवा अधिकारी के रूप में प्रदेश की सेवा में समर्पित हैं।

यह जोड़ी आज प्रदेश में नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। सीमित संसाधनों से निकलकर सपनों को साकार करने की जिद और एक-दूसरे का अटूट साथ—इस जोड़ी को विशेष बनाता है।

गोपाल शर्मा के 85 वर्षीय पिता जालम सिंह और माता दुर्गी देवी ने अपने बच्चों की शिक्षा के लिए संघर्ष और त्याग की मिसाल पेश की। आज उनके बेटे और बहू प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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