सफलता की कहानीः महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा नवज्योति स्वयं सहायता समूह

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सफलता की कहानीः महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा नवज्योति स्वयं सहायता समूह, हाथ के हुनर और सरकार के सहयोग से लिखी सफलता की कहानी।

मंडी – अजय सूर्या 

सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का लाभ अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। विशेषकर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका उल्लेखनीय रही है।

ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण है ग्राम पंचायत गौड़ा-गागल के सिहन गांव का नवज्योति स्वयं सहायता समूह। इस समूह की महिलाएं घरेलू उत्पाद तैयार कर न केवल अपने परिवार का सहारा बन रही हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल भी पेश कर रही हैं।

हुनर से सशक्तिकरण की ओर

समूह की महिलाएं बदाणा व बड़ियां बनाने, बुनाई, सिलाई-कढ़ाई, कुमकुम उत्पादन जैसी पारंपरिक और स्थानीय गतिविधियों में दक्ष हैं। इन कार्यों के माध्यम से वे नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हुई हैं। इन उत्पादों को वे स्थानीय बाज़ारों में बेचती हैं और धीरे-धीरे इनके लिए आस-पास के जिलों से भी मांग आने लगी है।

नेतृत्व में बदलाव की बयार

इस समूह की प्रधान माधुरी गुप्ता स्वयं एक प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने महिलाओं को संगठित किया, उन्हें प्रशिक्षण दिलवाया और आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।

उनका कहना है कि “शुरुआत में बहुत सी महिलाओं को संकोच था, लेकिन जब उन्हें यह समझ में आया कि थोड़ी मेहनत और सीख से वे खुद को और अपने परिवार को आगे बढ़ा सकती हैं, तो उन्होंने पूरे मन से कार्य करना शुरू किया। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हम किसी पर निर्भर नहीं हैं।”

उन्होंने बताया कि सरस मेलों के दौरान उनके उत्पाद शिमला, बिलासपुर, हमीरपुर, चंडीगढ़, देहरादून तक अच्छे दामों में बिके। उनके बनाए बदाणा-सेपू बड़ी की मांग शिमला में प्रदेश सचिवालय, कांगड़ा व कुल्लू तक है।

सर्वश्रेष्ठ समूह का मिला पुरस्कार

मधु गुप्ता ने बताया कि समूह की सदस्यों के अलावा उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी कार्य दिया है। सिलाई-कढ़ाई इत्यादि के लिए उन्हें मशीनें भी दी हैं। उनके समूह को सर्वश्रेष्ठ समूह के पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपए मिल चुके हैं।

सरकारी सहयोग बना आधार

महिला एवं बाल विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) तथा स्थानीय पंचायत द्वारा इस समूह को प्रशिक्षण, बीज पूंजी, और विपणन सहायता प्रदान की गई है। इससे समूह की महिलाएं आधुनिक तकनीक और व्यापारिक समझ से भी जुड़ सकीं।

समूह की सचिव नवीन लता गुप्ता ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया और कहा कि प्रदेश सरकार के सहयोग एवं मार्गदर्शन से हम जैसी महिलाओं को छोटे-छोटे कार्यों से घर बैठे रोजगार मिला है। इससे हम आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ी हैं। प्रत्येक महिला 10 से 12 हजार रुपए की मासिक आय प्राप्त कर रही है।

ग्रामीण विकास की मिसाल

नवज्योति स्वयं सहायता समूह अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक पहचान बन चुका है। गाँव की अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित होकर ऐसे ही समूहों से जुड़ने की इच्छा जता रही हैं।

उपायुक्त अपूर्व देवगन के बोल 

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि यदि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सामाजिक और आर्थिक विकास की मुख्यधारा में सशक्त रूप से भागीदार बन सकती हैं।

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