मंडी लोकसभा सीट से चुनाव में उतरना नहीं चाह रहे जयराम ठाकुर, ये बताई वजह

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मंडी – अजय सूर्या

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन कर रही है। नेता प्रतिपक्ष व पूर्व सीएम अपने गृह जिला की इस लोकसभा सीट पर जिताऊ उम्मीदवार माने जा रहे हैं। उनकी अगुवाई में डेढ़ साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में मंडी जिला की 10 में से 9 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। हालांकि लोकसभा की जंग में जयराम ठाकुर मंडी सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाह रहे हैं।

उनका कहना है कि मंडी संसदीय क्षेत्र में भाजपा के कई सक्षम कार्यकर्ता टिकट के हकदार हैं और उनके नाम का जिक्र करने की आवश्यकता नहीं है। मंगलवार को पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के वर्तमान सियासी हालात को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस किसी भी विधायक को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाना चाहेगी।

जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है और वो इसे बखूबी निभा रहे हैं। हाल ही में घटे प्रदेश सियासी घटनाक्रम में उनकी भूमिका और अहम हो जाती है। जयराम ने कहा कि उनका व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि प्रदेश की सियासत में जो वर्तमान हालात बने हैं, उसके मददेनजर न कांग्रेस और न भाजपा अपने किसी भी विधायक को लोकसभा चुनाव लड़ाएगी। कांग्रेस ने भी पहले नाम कुछ और तय किए थे, लेकिन अब अपने सिटिंग विधायकों को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाने का निर्णय लिया है तथा अन्य नामों पर मंथन चल रहा है।

जयराम ठाकुर ने आगे कहा कि प्रदेश में लोकसभा उम्मीदवारों की टिकटें तय करने में भाजपा ने कांग्रेस से बाजी मारी है। शिमला और हमीरपुर सीट पर भाजपा अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। हमीरपुर से केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और शिमला से सुरेश कश्यप को उम्मीदवार घोषित किया गया है। दोनों मौजूदा सांसद हैं। अन्य दो सीटों मंडी और कांगड़ा में भी भाजपा जल्द उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। इसके लिए पार्टी नेतृत्व गहन मंथन कर रहा है।

उन्होंने दावा किया कि मंडी सहित प्रदेश की चारों सीटें इस बार भाजपा की झोली में आएंगी। पिछले लोकसभा चुनाव में भी चारों सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था। उन्होंने कहा कि चारों सीटों पर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व टिकटें तय करेगा।

बता दें कि पिछले दो लोकसभा चुनाव में मंडी लोकसभा सीट भाजपा की झोली में रही है। वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा यहां से विजयी रहे थे। रामस्वरूप शर्मा के निधन के बाद वर्ष 2021 में मंडी सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस की प्रतिभा सिंह ने भाजपा को परास्त कर स्तब्ध कर दिया था। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार काबिज थी और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री थे।

रोचक बात यह है कि वर्ष 2013 में भी मंडी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे। तब प्रदेश में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी। भाजपा ने जयराम ठाकुर को उम्मीदवार बनाया था और उनका मुकाबला कांग्रेस की प्रतिभा सिंह से हुआ था। प्रतिभा सिंह ने तब उपचुनाव भारी मतों से जीता था।

मंडी सीट से भाजपा के पैनल में जयराम ठाकुर समेत चार दावेदार

प्रदेश भाजपा ने हाल ही में चार लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल बनाकर हाईकमान को भेजा था। मंडी लोकसभा सीट पर भाजपा के पैनल में जयराम ठाकुर समेत चार दावेदार शामिल किए गए हैं। इनमें पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, प्रदेश भाजपा महामंत्री बिहारी लाल शर्मा और अजय राणा के नाम शामिल हैं। इस सीट से फिल्म अभिनेत्री कंगना रणौत के नाम पर भी चर्चा चल रही है।

सिटिंग विधायकों को इसलिए चुनाव लड़ाने से बच रहीं भाजपा और कांग्रेस  

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सतारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की संख्या को देखते हुए दोनों पार्टियां इस बार विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ाने से बच रही हैं। दरअसल कांग्रेस के छह विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग की है। ये बजट पारित होने के समय सदन से नदारद रहे थे।

पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करने पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इन्हें अयोग्य ठहरा दिया है। इस पर इन विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी याचिका पर विस अध्यक्ष को चार सप्ताह का नोटिस दिया है।

वहीं मामले की अगली सुनवाई छह मई को निर्धारित की है। हिमाचल प्रदेश में 15 माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 में से 40 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा किया है। विपक्षी भाजपा को 25 सीटें मिलीं, जबकि तीन सीटों पर निर्दलीय जीते।

हाल ही में छह विधायकों को अयोग्य ठहराने के बाद प्रदेश विधानसभा में मौजूदा समय में विधायकों की संख्या 68 से घटकर 62 रह गई हैं। इनमें सत्ताधारी कांग्रेस के 34 और भाजपा के 25 विधायक हैं। तीन निर्दलीय विधायक भी भाजपा के हक में हैं।

छह विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के बाद इन सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को जीत मिलने पर भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर 31 हो जाएगी, जबकि तीन निर्दलीय विधायकों को मिलाकर यह तादाद 34 हो जाती है।

वहीं कांग्रेस महज एक विधानसभा सीट जीतकर बहुमत का आंकड़ा छू लेगी। ऐसे में प्रदेश में सबकी नजरें छह सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर रहेंगी। प्रदेश की चार लोकसभा सीटों और छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव पहली जून को होगा।

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