शास्त्री अध्यापक भर्ती में एनसीटीई के नियमों का विरोध करना निंदनीय, चंद लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए सरकार और विभाग को कर रहे गुमराह।
शाहपुर – नितिश पठानियां
शास्त्री अध्यापक भर्ती में एनसीटीई के नियमों का विरोध करना निंदनीय,चंद लोग अपने स्वार्थ के लिए सरकार और विभाग को कर रहे गुमराह।
ये कहना है शास्त्री बीएड एवं संस्कृत बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश कुमार का। राकेश कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक शिक्षा विभाग में चल रही शास्त्री बैचवाइज भर्ती काउंसलिंग प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
पर इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए अभ्यर्थी अब नियुक्ति हेतु भर्ती प्रक्रिया परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, किंतु कुछ गिने – चुने लोग जिनकी अर्हता एनसीटीई नियमों के तहत नहीं है।
वे बार – बार लोगों और सरकार को नए शास्त्री नियमों का उलाहना देकर गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। समस्त प्रशिक्षित शास्त्री बीएड वर्ग ऐसे लोगों की इस विचारधारा की कड़े शव्दों में निंदा करता है।
उंन्होने बताया कि सरकार और शिक्षा विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए ही शास्त्री भर्ती में एनसीटीई के नियमों को लागू किया है,जोकि एक सराहनीय कार्य है। सरकार और विभाग इसके लिए बधाई के पात्र हैं।
किंतु कुछ लोग दलगत राजनीति के चलते मात्र अपने स्वार्थ के लिए बेवजह सरकार की निंदा कर रहे हैं और भर्ती को पुराने नियमों के तहत करवाने की मांग कर रहे हैं,जोकि बिलकुल न्यायसंगत नहीं है।
क्योंकि शिक्षक बनने के लिए बी एड, डी एल एड या एन टी टी जैसे ट्रेनिग कोर्स करना अनिवार्य हैं,इसलिए शास्त्री भर्ती में भी बी एड करने से छूट मांगना गलत है।
उंन्होने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पालना कर रही है। जिसके लिए सरकार को कोसना कतई सही नहीं हैं।
उंन्होने ये भी कहा कि जो संस्कृति सरंक्षण संघ जिला काँगड़ा इकाई के चंद सदस्य सरकार को संस्कृत का दुश्मन का दुश्मन कह रहे है ये संघ शास्त्री भर्ती के साथ ही पैदा हुआ है। संस्कृत संस्कृति की रक्षा करना तो बहाना है असली मकसद नॉकरी पाना है।
इस संघ के सदस्य बताए कि आज तक संस्कृति सरंक्षण के लिए क्या कार्य किया। इन चंद लोगों के द्वारा सरकार को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है।
उंन्होने कहा कि बीएड पास शास्त्री अभ्यर्थियों ने सरकार और शिक्षा विभाग से यह निवेदन किया है कि जल्द से जल्द शास्त्री बैचवाइज़ भर्ती का परिणाम जारी किया जाए,ताकि आचार संहिता लगने से पहले सभी योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल जाए।

