मंडी का शिवरात्रि मेला देवी देवताओं का मेला, ओर जिले का मेला नहीं, यह अंतराष्ट्रीय मेला है – आकाश शर्मा

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मंडी – अजय सूर्या

कांग्रेस पार्टी जिला प्रवक्ता आकाश शर्मा ने जारी एक व्यान में कहा कि कुछ दिनों से एक विवादित विषय सामने आया है कि देवता श्री खुडी जहल देवरी के लोग हमारे पास आए जिसमें उनकी कमेटी के मेंबर व गुर देवता भी साथ थे। उन्होंने कहा कि हमारा देवता राजाओं के समय से शिवरात्रि मेले में आते थे और उनकी भूमि मंडी में छतरी बाल में और अन्य जगहों में स्थित है।

राजा मंडी द्वारा देवता को भाड़ा सोने की चादर व सोने का छात्र भी प्रदान किया गया है । लेकिन अब देव समिति द्वारा हमारे देवता को निमंत्रण नहीं भेजा जाता है और देवता जिद कर रहे हैं कि उन्हें मंडी मेले में आना है। हमने उनसे कहा कि यदि देवता को आना चाहते है तो उन्हें कौन रोक सकता है उन्हें किसी भी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

लेकिन उन्होंने कहा कि देवता चाहते हैं कि उन्हें निमंत्रण मिले और व किसी भी प्रकार का नजराना व खर्चा नहीं लेंगे केवल मात्र वह अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में आना चाहते हैं । जो बारिश नहीं हो रही है यह भी उन्होंने रोकी है और लिखित तौर पर उन्होंने कहा कि जैसे ही देवता को निमंत्रण प्राप्त होता है तो वह किसी भी स्थान पर कहीं भी बारिश करवा सकते हैं।

यह विषय जिलाधीश के समक्ष भी रखा गया लेकिन एडीएम छुट्टी पर होने के कारण इसे डीपीआरओ के समक्ष रखा गया । आकाश शर्मा ने उनकी सारी रिप्रेजेंटेशन फाइल देखी लेकिन एक प्रश्न मन में उत्पन्न हुआ कि जब देव समितियां प्रशासन द्वारा कहा गया कि यह देवता बॉर्डर पर हैं आंनी में है कुल्लू में है कुल्लू दशहरे में जाते हैं या रामपुर, शिमला जाते हैं इसलिए वह मंडी मेले में नहीं आ सकते।

कल्लू के बालू नाग व श्रिगा ऋषि भी मंडी आने की जिद कर रहे हैं तो अनायास यह प्रश्न मस्तिष्क में कौंधा की शिवरात्रि मेला कोई जिला का या राज्य का मेला नहीं है यह अंतर्राष्ट्रीय मेला है और यह जनरल हाउस में हिदायत दी जाती है की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल कूद वह कलाकारों को बुलाया जाए तो क्या जिन देवी देवताओं का यह मेला है उनके ऊपर प्रश्न चिन्ह है कि यदि वह सुंदर नगर के हैं कल्लू के हैं या हिमाचल के अन्य क्षेत्र के हैं तो वह मंडी नहीं आ सकते।

यह क्या विषय है एक तरफ तो हम एक मेले की गरिमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बता रहे हैं उस मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर का ओहदा दिया है और इस मेले में अपने देवी देवताओं को दूसरे जिले में यदि वह स्थित है और बाउंड्री डिस्प्यूट के कारण यह काफी लंबे अरसे तक वह यहां पर नहीं आए।

राजाओं के समय में आते रहे और अब उनके आने पर किस प्रकार की रोक है यह प्रश्न जरूरी भी है और आवश्यक भी है कि यदि मेल अंतरराष्ट्रीय है तो देवी देवताओं पर किस प्रकार की रोक न हो यह मेरा प्रश्न प्रशासन से देव समाज से वह शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष से है कि वह इस विषय पर अपनी राय भी दें।

और निर्णय भी दें कि यह किस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय मेला है जिस् की कुछ किलोमीटर दूर पर स्थित जिले के देवी देवता ही नहीं आ सकते और वह देवी देवता जो ना तो कोई खर्चा चाहते हैं नजराना चाहते हैं वह केवल मात्र शिवरात्रि मेला में आना चाहते हैं। मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं इनमे किसी प्रकार की राजनीती ओर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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