शोध: महंगी दवाओं से नहीं, शास्त्रीय संगीत से दूर होगा अब तनाव, आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने किया दावा

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मंडी – डॉली चौहान

आज के समय में सबसे बड़ी तनाव की समस्या का समाधान महंगी दवाओं से नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत से हो सकता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव दूर भगाने के लिए आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नया शोध किया है।

इसमें दावा किया है कि अगर तनावग्रस्त व्यक्ति उदासी से भरा शास्त्रीय संगीत खासकर राग मिश्र जोगिया सुनें तो डिप्रेशन में राहत मिल सकती है। इससे बाहर भी आ सकता है।

यह राग करुण रस (दुखद भावनाओं) के संचार के लिए जाना जाता है। शोधकर्ताओं ने 20 लोगों के मस्तिष्क पर विशेष उपकरणों से शोध किया तो देखा गया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत राग मिश्रा जोगिया सुनने से मस्तिष्क की अल्फा गतिविधि में हुई और अवसादी की ग्लोबल और लोकल कनेक्टिविटी और स्फूर्ति बढ़ गई।

यह शोध ओपन-एक्सेस जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित किए गए। इस शोधपत्र का सह-लेखन आशीष गुप्ता, प्रोफेसर ब्रज भूषण और निदेशक आईआईटी लक्ष्मीधर बेहरा ने किया है।

उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि संगीत में हमारे मन की भावना बदलने की ताकत है और यह जगजाहिर है कि लोग मन की भावना में उत्साह जगाने या उदासी से उबरने के लिए अक्सर संगीत का सहारा लेते हैं।

सवाल उठता है कि हम कभी-कभी उदास संगीत सुनना क्यों पसंद करते हैं, जबकि हम सभी जिंदगी की उदासी कम करना चाहते हैं, उदासी से बचना मनुष्य का सहज स्वाभाव है, लेकिन जब मन की इस विशेष भावना की अभिव्यक्ति कला के माध्यम से हो तो एक अजीब और स्थायी आकर्षण पैदा होता है।

इसे ट्रैजेडी पैराडॉक्स कहा गया है। इसको लेकर सदियों से दार्शनिक भी उलझन में है। यह अनुमान लगाया गया है कि ट्रैजेडी पैराडॉक्स की सामान्य वजह उदास धुनों में एक सौंदर्य आकर्षण का होना है।

उदास संगीत में भावनाओं और यादों का होता है बेहतर प्रोसेस

शोध के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि उदास संगीत सुनने के दौरान मस्तिष्क की गतिविधि एसएआर स्टेट और बेसलाइन रेस्टिंग स्टेट दोनों की तुलना में विशिष्ट और अलग होती है।

उदास संगीत में कोपिंग मेकेनिज्म बनने की वजह अल्फा स्टेट में भावनाओं और यादों का बेहतर प्राेसेस होना है। ‘हालांकि कोपिंग इफेक्ट का सहज संबंध केवल संगीत के सौंदर्य आकर्षण से नहीं है, जैसा कि पहले माना जाता था, बल्कि यह उदास संगीत का अंदरूनी गुण है।

ऐसे किया शोध

यह शोध बीस लोगों पर किया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह जानना चाहते थे कि किसी अप्रिय अनुभव या याद के दौरान उदास संगीत सुनने की हमारे मस्तिष्क पर क्या प्रतिक्रिया होती है।

यह जानने के लिए इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (ईईजी) से विभिन्न परिस्थितियों में बीस लोगों की मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया।

शोधकर्ताओं ने यह देखा कि किसी दुखद अनुभव को याद करते समय (यानी एसएआर के दौरान) गामा तरंग की गतिविधि बढ़ जाती है, जबकि उदास संगीत सुनने से मस्तिष्क की अल्फा गतिविधि में वृद्धि होती है। अल्फा तरंगअवसादी की ग्लोबल और लोकल कनेक्टिविटी और स्फूर्ति बढ़ाती है और गामा अवसाद तो बढ़ाती है।

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