7 महीने की बेटी को गोद में ले “ललिता” बनी कॉलेज कैडर की सहायक प्रोफेसर

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बिलासपुर, 10 मार्च – सुभाष चंदेल

“मान लिया तो हार है, ठान लिया तो जीत है”, यह पंक्तियां हिमाचल के शिमला जिला की बेटी व बिलासपुर की पुत्र वधू ललिता शर्मा पर सटीक बैठती हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि सफलता एक ही दिन में नहीं मिलती, लेकिन यदि निरंतर दृढ़ निश्चय से कोशिश करते रहे तो एक दिन सफलता भी आपके कदम चूम लेती है।

ललिता शर्मा ने म्यूजिक के असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा पास की है। एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाली ललिता शर्मा ने सफलता की प्रेरणादायक इबारत लिखी है।

शिमला जिला के कुपवी उपमंडल के छतारी गांव की रहने वाली ललिता शर्मा ने गांव के स्कूल से जमा दो तक की पढ़ाई की। इसके बाद नाहन महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पंजाब यूनिवर्सिटी से ललिता ने एमफिल (M.Phil) की पढ़ाई पूरी की।

2021 में ललिता बिलासपुर के विकास शर्मा के साथ परिणय सूत्र में बंध गई। लेकिन ललिता ने इसके बाद भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। एक समय ऐसा भी आया जब ललिता के ससुर का निधन हो गया। इसके बाद परिवार का अतिरिक्त बोझ उनके कंधों पर आ गया, लेकिन ललिता के हौसले बुलंद थे व परिवार ने बखूबी साथ दिया। लिहाजा, ललिता ने भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी।

ललिता की सफलता में अहम बात यह है कि ललिता की 7 महीने की एक बच्ची भी है। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चे की परवरिश का भी ध्यान रखना था। लेकिन ललिता ने इन सब जिम्मेदारियों के बावजूद अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखा।

ललिता ने बातचीत में बताया कि पढ़ाई एक दिन में पूरी नहीं होती। इसके लिए आपको निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए। ललिता ने बताया कि वह 9 भाई-बहन है। एक भाई सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है।

ललिता ने बताया कि पहले माता-पिता और अब सास-ससुर सहित पति का साथ मिला। सभी ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, इसका नतीजा है कि वह आज असिस्टेंट प्रोफेसर बनने में सफल हो पाई है।

ललिता ने बताया कि काफी कठिन था, क्योंकि बच्चे की परवरिश के साथ-साथ परिवार की अन्य जिम्मेदारियां भी थी। लेकिन मन में ठान लिया था कि कुछ करके दिखाना है और वह निरंतर प्रयास करती रही। ललिता ने कहा कि महिलाएं मौजूदा में हरेक  क्षेत्र में आगे है। महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर भाग ले रही है।

उन्होंने कहा कि कई बार महिलाएं घर की चारदीवारी में इतना उलझ जाती है कि अपने लक्ष्य से पीछे हटने को मजबूर हो जाती है। ऐसी महिलाओं को अपने हौसले बुलंद रखने चाहिए और परिवार को भी उनका साथ देना चाहिए। ललिता ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों को दिया है। साथ ही जिन लोगों ने आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है, उनका भी धन्यवाद किया है।

ललिता के पिता कृषक है व मां कुशल गृहिणी है। ललिता ने माता-पिता के साथ रहकर भी उनके कार्य में बखूबी हाथ बंटाया। पिता आत्माराम व माता विमला देवी बेटी की सफलता से खासे खुश है। उन्होंने कहा कि बेटी ने इस सफलता को चरितार्थ किया है, जिसमे कहा जाता है कि “बेटी “एक नहीं दो-दो कुलों का नाम रोशन करती है।”

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