शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 5000 खैर के पेड़ों का अवैध कटान पर हाईकोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने उक्त मामले में राज्य सरकार को वस्तुस्थिति से अवगत करवाने के आदेश जारी किए हैं। मामले पर सुनवाई 27 मई को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि सिरमौर जिले के त्रिलोकपुर जंगल में बड़े पैमाने पर खैर के पेड़ों का अवैध कटान का मामला सामने आया था। मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र के अनुसार बीते 8 महीनों में करीब 5000 खैर के पेड़ काटे जा चुके हैं और इस दौरान जंगल की भूमि को तीन फीट तक खोदकर जड़ें तक उखाड़ ली गई हैं। इस अवैध कटान में हिमाचल और हरियाणा के ठेकेदारों की मिलीभगत बताई गई है।
यह खैर कटान त्रिलोकपुर के प्रसिद्ध बाला सुंदरी मंदिर और वन विभाग के रेंज ऑफिसर कार्यालय के पास ही हो रहा था, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह माफिया रातोंरात लकड़ी को फैक्टरियों या अन्य स्थानों पर बेच रहा था, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध व्यापार हुआ।
खैर माफिया ने पहले निजी भूमि से पेड़ काटने की अनुमति ली थी, लेकिन इस अनुमति की आड़ में जंगल के हजारों पेड़ काट दिए। सरकारी नियमों के अनुसार जंगल झाड़ी श्रेणी की भूमि, चाहे वह निजी हो या सरकारी वहां से खैर का कटान प्रतिबंधित है। खैर की लकड़ी की बाजार में भारी मांग है और एक बड़े पेड़ की कीमत एक लाख रुपये तक हो सकती है। लिहाजा 5 हजार पेड़ों के अवैध कटान से करोड़ों का अवैध कारोबार होने की आशंका जताई जा रही है।

