2555 एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाने की तैयारी शुरू

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एसएमसी के तहत पीजीटी, डीपीई, टीजीटी, सीएंडवी और जेबीटी लगाए गए हैं। शिक्षकों की लंबी सेवाओं को देखते हुए सरकार ने अब इस बाबत सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगामी फैसला लेने की कवायद शुरू की है।

शिमला, जसपाल ठाकुर

 

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त 2555 एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य साचिव अनिल खाची की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी के पास इस बाबत प्रस्ताव पहुंच गया है। जुलाई में इन शिक्षकों के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है।

 

वर्ष 2012 से एक-एक साल का सेवा विस्तार देकर दुर्गम क्षेत्रों में एसएमसी शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सरकार को एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।

 

एसएमसी के तहत पीजीटी, डीपीई, टीजीटी, सीएंडवी और जेबीटी लगाए गए हैं। शिक्षकों की लंबी सेवाओं को देखते हुए सरकार ने अब इस बाबत सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगामी फैसला लेने की कवायद शुरू की है।

 

बीते अप्रैल में हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों के मामले मुख्य सचिव अनिल खाची की अध्यक्षता में सुलझाने के लिए 11 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।

 

कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, कार्मिक, विधि और शिक्षा सचिव को सदस्य बनाया है। उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक इसके सदस्य सचिव बनाए गए हैं। कमेटी में विशेष/अतिरिक्त और संयुक्त सचिव स्तर के वित्त और शिक्षा विभाग की ए, बी और सी शाखा के अधिकारी भी सदस्य बनाए गए हैं।

 

शिक्षकों से जुड़े पदोन्नति, तबादलों, नियुक्तियों और नियमितीकरण से संबंधित मामलों की सुनवाई इस कमेटी में होनी है। कमेटी की सिफारिश पर ही कैबिनेट मंजूरी को मामले भेजे जाएंगे।

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