बिलासपुर – सुभाष चंदेल
1962 में भारत चीन युद्ध के योद्धा 9 ग्रेनेडियर में कैप्टन रहे दुर्गा सिंह 31 दिसम्बर, 2024 को अपनी सांसारिक यात्रा सम्पूर्ण कर प्रभु चरणों में विलीन हो गए है। 31 दिसंबर को उनका 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। कैप्टन दुर्गा सिंह बिलासपुर जिला के देलग गांव के निवासी थे। स्वर्गीय कैप्टन दुर्गा सिंह ने 1962 में भारत चीन युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा उन्होंने 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया। तदोपरांत उन्होंने 1971 में पाकिस्तान से बंगलादेश को आजाद करवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। सेवाकाल के बाद भी उनका जीवन उतना ही प्रभावशाली रहा, जिसने युवा पीढ़ियों में देशभक्ति और लचीलेपन की भावना को बढ़ावा दिया।
कैप्टन दुर्गा सिंह की कहानी न केवल अतीत का एक प्रमाण है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का एक सतत स्रोत है। कैप्टन दुर्गा सिंह को याद करते हुए हमें उन लोगों के साहस और दृढ़ संकल्प की याद आती है जिन्होंने मानवता की सेवा की। उनकी कहानियां हमारे वर्तमान और भविष्य की प्रेरणास्रोत हैं।
उनके सुपुत्र कुलदीप ठाकुर ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय कैप्टन दुर्गा सिंह ने अपनी पूरी सेवा के दौरान अपने कर्तव्य से परे जाकर राष्ट्र की सेवा की। इस कारण उन्हें भारत के सैन्य इतिहास में एक श्रद्धेय स्थान प्राप्त हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद स्वर्गीय दुर्गा सिंह ने समुदाय और देश के प्रति अपने समर्पण से प्रेरणा देना जारी रखा। अनुभवी मामलों और शैक्षिक पहलों में सक्रिय रूप से भाग लिया। पूरी सेवा के दौरान राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
कुलदीप ठाकुर ने बताया कि उनकी आत्मिक शान्ति हेतु ब्रहाभोज (धर्म शान्ति) कल यानी 13 जनवरी 2025, सोमवार को गावं देलग, डाकघर निचली भटेड, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी लोगों से अपील की है कि वे अपनी उपस्थिति दर्ज कर उनके पिता स्वर्गीय कैप्टन दुर्गा सिंह की आत्मिक शांति हेतु प्रार्थना करें।