18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकार ने घोषित किया आंगनबाड़ी सह-स्कूल

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शिमला – हिमखबर डेस्क 

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बाल्यकाल देखभाल के साथ औपचारिक स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है। इससे उनकी प्रारम्भिक शिक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के को-लोकेशन के लिए जारी दिशा-निर्देशों को अमल में लाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जा चुका है।

प्रदेश के लिए स्वीकृत 1,030 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में से जिला चम्बा के लिए 100 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों को स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व सुपरवाइजर को स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।

सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री बाल पोषण आहार योजना शुरू की है। योजना के तहत राज्य के 15,181 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 5.34 लाख से अधिक छात्रों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा रहा है।

14,464 विद्यालयों में किचन गार्डन किए तैयार

प्रदेश के 14,464 विद्यालयों में मिड-डे-मील कार्यकर्त्ताओं, स्कूल प्रबन्धन समिति, स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों की मदद से किचन गार्डन तैयार किए गए हैं। इन किचन गार्डन में मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं।

विद्यालयों के परिसरों के साथ-साथ सीमित स्थानों वाले स्कूलों में बड़े कंटेनर, पोट्स और बाल्टियों में सब्जियां और जड़ी-बूटियां उगाई जाती हैं। किचन गार्डन में उगाई गईं सब्जियों का उपयोग मिड-डे-मील बनाने में किया जा रहा है। इसके साथ-साथ बच्चों को प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के महत्व के बारे में भी अवगत करवाया जाता है।

इस दौरान सरकार ने मिड-डे-मील कार्यकर्त्ताओं के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ौतरी की है। इससे 21,115 मिड-डे-मील वर्कर्ज लाभान्वित होंगे और अब उनको 5,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

इस वित्त वर्ष में आंगनबाड़ी सेवा योजना के तहत खर्च किए गए 113 करोड़ रुपए

इस वित्त वर्ष में आंगनबाड़ी सेवा योजना के तहत 113 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में विशेष पोषाहार कार्यक्रम के तहत 1516.09 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

सरकार के प्रयास विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार उचित पोषण बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली, गैर-संचारी रोगों के कम जोखिम और स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप हैं।

वर्तमान राज्य सरकार ने बाल्यावस्था देखभाल और बच्चों के समग्र विकास को केन्द्र में रखकर अनेक नीतिगत कदम उठाए हैं।

पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समावेशी विकास पर विशेष बल देते हुए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश में प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

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