
शिमला – नितिश पठानियां
शिव प्रताप शुक्ला 18 फरवरी दोपहर 2 बजे हिमाचल प्रदेश के 29वें राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। वह 17 फरवरी को शिमला पहुंचेंगे।
मौजूदा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर 14 फरवरी को देर सायं गोवा से शिमला पहुंचेंगे। इसके बाद 16 फरवरी को उनकी राजभवन से विदाई होगी।
हिमाचल प्रदेश से विदाई के बाद उनका बिहार जाने का कार्यक्रम है, जहां का उनको राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
इस तरह नवनियुक्त राज्यपाल के स्वागत और मौजूदा राज्यपाल की विदाई के लिए राजभवन को तैयार कर लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल 1952 को उत्तर प्रदेश के रुद्रपुर में जन्मे शिव प्रताप शुक्ला विद्यार्थी जीवन में ए.बी.वी.पी. में सक्रिय रहे तथा 4 बार विधायक और 3 बार केंद्रीय मंत्री रहे हैं।
इससे पहले 13 जुलाई, 2021 को राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का पदभार संभाला था। इस तरह 19 माह तक उनका कार्यकाल रहा।
क्या अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे शुक्ला
हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला क्या अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे? ऐसा इसलिए क्योंकि अब तक राज्य के 3 राज्यपाल ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अब तक 27 जनवरी, 2015 तक राज्यपाल रही उर्मिला सिंह के अलावा प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद प्रथम राज्यपाल रहे एस. चक्रवर्ती और वी.एस. कोकजे ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं।
प्रदेश के बाकी राज्यपाल सक्रिय राजनीति में वापस लौटने सहित अन्य कारणों से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।
कलराज मिश्र के राज्यपाल बनने से पहले आचार्य देवव्रत भी करीब 4 साल का अपना कार्यकाल पूरा कर पाए।
उनके बाद प्रदेश के राज्यपाल बने कलराज मिश्र को 2 माह से कुछ अधिक समय ही मिल पाया, क्योंकि उनका तबादला अब राजस्थान कर दिया गया है।
इसके बाद बंडारू दत्तात्रेय करीब 1 साल 10 माह और राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर 19 माह ही राज्यपाल के पद पर अपनी सेवाएं दे पाए।
नए राज्यपाल को देंगे पूरा सहयोग : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि नए राज्यपाल के रूप में शिव प्रताप शुक्ला को प्रदेश सरकार पूरा सहयोग देगी।
उन्होंने कहा कि नवनियुक्त राज्यपाल से उन्होंने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। ऐसे में प्रदेश आगमन पर उनका स्वागत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वह गोवा में मौजूदा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के पुत्र की शादी में भाग लेने गए थे, जहां से उनको नए राज्यपाल की नियुक्ति की सूचना मिली।
