हिमखबर डेस्क
नशे को हरा चुके पंकज ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह छह साल से चिट्टा ले रहा था। इससे पहले मैं 14 साल तक भांग का आदि हो गया था।
जब मैं चिट्टा लेता था तो मैंने शरीर की कई नसों में इंजेक्शन लगाए। कई बार तो इंजेक्शन लगाने के लिए मुझे नसें भी नहीं मिलती थी। मैं नशा छोड़ना चाहता था लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहा था।
मैं ज्यादा से ज्यादा दो दिन तक बिना नशा किए रह पाता था। उसके बाद तीसरे दिन मुझे डोज चाहिए ही होती थी। मेरे साथ जो नशा करते थे करीब 14 दोस्तों ने अपनी जान नशे के कारण गवाई है।
मेरे परिवार वालों ने मेरा साथ दिया और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में मेरा उपचार करवाया। मेरे परिवार ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। अगर वो मेरे साथ न होते तो शायद में नशे को हरा न पाता। नशे को छोड़ने के परिवार वालों की अहम भूमिका होती है।