हिमाचल सरकार ने हिमकेयर योजना में नाै तरह के क्लेम पर लगाई पाबंदी, जानें पूरा मामला

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अस्पतालों को उपलब्ध करवाए जाने वाले सामान का अब हिमकेयर योजना के तहत भुगतान नहीं होगा। प्रदेश सरकार अस्पतालों को जिन सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध करवाती है उन्हें हिमकेयर के दायरे से बाहर करने का फैसला लिया गया है।

गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। अब तक ऐसी सुविधाओं के भी हिमकेयर में बिल बनाए जा रहे थे जिसके लिए सरकार अस्पतालों को सालाना बजट उपलब्ध करवा रही है। इससे सरकार पर दोगुना बोझ पड़ रहा था। सरकार ने हिमकेयर योजना के तहत 9 तरह के क्लेम पर पाबंदी लगाई है।

अब हिमकेयर में इनका नहीं कर सकेंगे दावा

अस्पतालों में पंजीकरण शुल्क, सामान्य वार्ड के बेड चार्ज, नर्सिंग और बोर्डिंग शुल्क, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, मेडिकल प्रैक्टिशनर और कंसल्टेंट की फीस, एनेस्थीसिया, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑक्सीजन, ओटी चार्ज और सर्जिकल उपकरणों की लागत, दवाइयां और ड्रग्स, पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच यानी एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, लैब डायग्नोस्टिक्स आदि, जिनकी दरें संबंधित संस्थानों की ओर से अनुमोदित हों, मरीज का भोजन, प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन खर्च उपचार से पहले और डिस्चार्ज के 15 दिन तक की जांच, दवाइयां आदि का अब हिमकेयर योजना में दावा नहीं किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इन सभी मदों के लिए सरकार अलग से अस्पतालों को बजट उपलब्ध करवाती है।

अब क्लेम का भुगतान वास्तविक खर्च या तय पैकेज रेट पर होगा

प्रतिपूर्ति दावों की यह राशि प्रदेश सरकार की ओर से हिमकेयर योजना के तहत वहन करने के अलावा सरकारी अस्पतालों को बजट में उपलब्ध करवाई जा रही है। इस तरह से एक ही तरह के पैकेज के लिए दो अलग-अलग तरीकों से सरकार की ओर से धनराशि उपलब्ध करवाई जा रही थी।

इस युक्तिकरण के बाद जो राशि बजट में सरकारी अस्पतालों को प्रदान की जाएगी, वह हिमकेयर पैकेज का हिस्सा नहीं होगी। इसके अलावा सरकार ने फैसला लिया है कि अब क्लेम का भुगतान वास्तविक खर्च या तय पैकेज रेट, जो भी कम होगा उसी के आधार पर किया जाएगा।

साथ ही सरकारी अस्पतालों को वास्तविक व्यय के बिल प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा उपचार से जुड़े अन्य खर्च जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होंगे और राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले बजट में भी शामिल होंगे उन्हें भी क्लेम में शामिल नहीं किया जाएगा।

विधानसभा में भी उठा था हिमकेयर का मुद्दा

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी हिमकेयर का मामला जोरशोर से उठा था। विपक्ष ने सरकार पर योजना को बंद करने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर हिमकेयर योजना में 110 करोड़ के घोटाले का मामला उठाया था। बुधवार को मुख्यमंत्री ने शिमला में कहा था की, हिमकेयर में 4 मर्दों के बच्चेदानी के ऑपरेशन दिखा दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार हिमकेयर योजना को बंद नहीं करेगी, इसमें सुधार किए जाएंगे।

विजिलेंस भी कर रही मामले की जांच

मुख्यमंत्री ने हिमकेयर योजना में पूर्व सरकार के समय हुए घोटालों की जांच राज्य विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी है। विजिलेंस ने भी मामले की जांच शुरू करते हुए संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा सोसायटी से रिकार्ड तलब किया है। सरकार की ओर से करवाए गए आंतरिक ऑडिट में मेडिकल कॉलेजों में ऑपरेशन के फर्जी बिल इस्तेमाल करने और एक्सपायरी डेट के लैंस उपयोग करने का खुलासा हुआ था।

क्या है हिमकेयर योजना

पूर्व भाजपा सरकार ने जनवरी 2019 में हिमकेयर योजना शुरू की थी, जिसमें प्रदेश के लोगों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का वार्षिक कैशलेस इलाज करवाने की सुविधा दी गई थी। एक कार्ड पर परिवार के अधिकतम पांच सदस्यों को लाभ देने का प्रावधान है। योजना उन परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई थी, जो केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आते।

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