हिमखबर डेस्क
राज्य स्तरीय नलवाड़ किसान मेले में इस बार पशु प्रदर्शनी ने खासा आकर्षण बटोरा। सुंदरनगर प्रशासन और पशुपालन विभाग की बेहतर व्यवस्थाओं के चलते मंडी और बिलासपुर जिलों से बड़ी संख्या में पशुपालक अपने उत्कृष्ट पशुओं के साथ मेले में पहुंचे, जिससे प्रदर्शनी में रौनक दोगुनी हो गई।
प्रदर्शनी में विभिन्न नस्लों की गाय, बैल और बकरियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं, लेकिन दो पशुओं ने पूरे मेले में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं।
गोहर के युवा पशुपालक दीपक कुमार की 52 लीटर दूध देने वाली गाय ने सभी को हैरान किया, वहीं बिलासपुर के मार्कंडेय निवासी छोटू राम का डेढ़ क्विंटल वजनी बकरा ‘गब्बर सिंह’ चर्चा का विषय बना रहा।
एमसीए तक पढ़ाई करने वाले 32 वर्षीय दीपक कुमार ने बताया कि लंबे समय तक सरकारी नौकरी की तलाश के बाद उन्होंने नीदरलैंड नस्ल की दुधारू गायों का पालन शुरू किया।
आज उनके पास तीन गाएं हैं, जो करीब 52-52 लीटर दूध देती हैं और उनसे वह हर महीने लगभग 80 हजार रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं।
‘गब्बर सिंह’ ने बदल दी छोटू राम की किस्मत
छोटू राम का तीन साल का बकरा ‘गब्बर सिंह’ अपने भारी-भरकम आकार के कारण प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बना रहा। करीब डेढ़ क्विंटल वजन वाले इस बकरे ने क्रॉस ब्रीडिंग के जरिए अब तक करीब डेढ़ लाख रुपए की कमाई करवाई है। छोटू राम इसे प्यार से ‘रामू’ भी कहते हैं और मानते हैं कि इसने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
पशुपालन के प्रति बढ़ा उत्साह
मेले में पहुंचे लोगों ने भी पशु प्रदर्शनी में खास रुचि दिखाई और आधुनिक पशुपालन से जुड़ी जानकारी हासिल की। कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी न केवल मेले की शान बनी, बल्कि युवाओं को पशुपालन की ओर प्रेरित करने में भी सफल रही।
पशुपालन विभाग सुंदरनगर के उपमंडलीय वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी सुंदरनगर डॉ. घनश्याम भूपल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से इस मर्तबा पशु प्रदर्शनी में दूर दूर से लोग अपने पशुओं के साथ पहुंचे है और पशुपालकों की भी पशुओं के प्रति लगाव और रुचि देखते ही बन रही है।
इस मर्तबा पशु प्रदर्शनी में जहां घोड़े शामिल हुए है वही पर बकरा गब्बर और 52 लीटर दूध देने वाली गाय भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
डॉ. घनश्याम भूपल ने समस्त पशु प्रेमियों को ज्यादा से ज्यादा पशुओं के प्रति लगाव और उन्हें पालकर अपनी आजीविका बढ़ाने का आह्वाहन किया है।
पशुपालन विभाग द्वारा प्रदर्शनी स्थल पर की गई साफ-सफाई, पशुओं के लिए उचित स्थान और चिकित्सा सुविधाओं ने प्रतिभागियों को प्रभावित किया। वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं भी चाक-चौबंद रहीं।

