
बीबीएन- सुभाष चंदेल
हिमाचल के दवा उद्योगों में निर्मित छह दवाएं केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की पड़ताल में गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाई है। इन दवाओं का इस्तेमाल एलर्जी, दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्राल व जीवाणू संक्रमण के उपचार में किया जाता है।
हिमाचल के पांच दवा उद्योगों में निर्मित इन छह दवाओं के संदर्भ में ड्रग अलर्ट जारी होते ही राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण ने संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस जारी कर बाजार से फेल हुए दवा उत्पादों का पूरा बैच हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इसके अलावा सहायक दवा नियंत्रक व दवा निरीक्षकों को संबंधित उद्योगों का दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए है। इन दवाओं का निर्माण बद्दी, झाड़माजरी व पावंटा साहिब स्थित दवा निर्माण इकाईयों में हो रहा था। , इसके अलावा सीडीएससीओ की पड़ताल में मध्यप्रदेश, तमिलनाडू ,यूपी, गुजरात , पंजाब, उतराखंड, महाराष्ट्र व तेलंगाना के दवा उद्योगों में निर्मित 16 तरह की दवाएं सब-स्टेंडर्ड निकली हैं।
नवंबर में सीडीएससीओ ने देश भर के अलग-अलग राज्यों से 1102 दवाओं के सैंपल एकत्रित किए थे , जिनमें से जांच के दौरान 22 दवाएं सब-स्टेंडर्ड पाई गई, जबकि 1080 दवाएं गुणवता के पैमाने पर सही निकली है। इनमें हिमाचल के पांच दवा उद्योंगों में निर्मित छह दवाएं भी शामिल है। पावंटा साहिब के एक ही दवा उद्योग में निर्मित दो दवाओं के सैंपल फेल हुए है।
इन दवाओं में एलर्जी व उच्च रक्तचाप के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं के सैंपल सीडीएससीओ बद्दी व कोलकाता ने भरे थे। इसके अलावा बद्दी के जुड्डी कलां स्थित दवा कंपनी में निर्मित दर्द निवारक दवा भी सब-स्टेंडर्ड पाई गई है। इस दवा के सैंपल कोहिमा के ड्रग डिपार्टमेंंट ने जांच के लिए भेजे थे।
बद्दी के संड़ोली स्थित दवा कंपनी के दंत और चिकित्सा प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किए जाने वाला इंजेक्शन भी जांच में अधोमानक पाए गए है। इस कंपनी के सैंपल राज्य दवा निंयत्रक प्राधिकरण ने भरे थे और आरडीटीएल चंड़ीगढ़ में इनकी जांच करवाई गई, जहां यह फेल पाए गए।
झाड़माजरी की दवा कंपनी में निर्मित कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण की दवा भी सब-स्टेंडर्ड पाई गई है। झाड़माजरी की ही एक अन्य दवा कंपनी में निर्मित दवा भी फेल हो गई है।
बाजार से दवाइयों का पूरा स्टॉक हटाने के निर्देश
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि संबंधित फार्मा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें सब-स्टेंडर्ड दवा का पूरा स्टॉक बाजार से हटाने के आदेश दे दिए हैं। इसके अलावा संबंधित क्षेत्रों के सहायक दवा नियंत्रकों को उन यूनिट की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है, जिनकी दवाओं के सैंपल बार-बार फेल हो रहे हैं।
