बिलासपुर – सुभाष चंदेल
हिमाचल प्रदेश वैटरन सैनिक कल्याण एंव विकास समिति के प्रदेशाध्यक्ष व युनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्स सर्विसमैन जेसीओ ओ-आर हिमाचल प्रदेश के वाईस चेयरमैन वैटरन कैप्टन बालक राम शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि मौजूदा समय में हिमाचल से करीब 1 लाख 40 हजार सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में भर्ती होकर देश की सीमाओं की कर रहे रक्षा लोकसभा चुनाव को लेकर पूर्व सैनिकों से लेकर बेरोजगारों के सबसे बड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती है।
इस राज्य का योगदान विश्व युद्ध से लेकर सेना ऑपरेशनों तक बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है मौजूदा समय में प्रदेश से करीब 1 लाख 40 हजार सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। अब इन युवाओं के लिए अग्निपथ योजना 16 जून 2022 से शुरू हो चुकी है जिसमें भर्ती होने वाले अग्निवीर 4 साल तक अपनी सेवाएं देंगे।
ऐसे में इस योजना के शुरू होने के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव हो रहे हैं तो नेताओं के साथ साथ इस योजना की भी परीक्षा होगी। इन युवाओं के लिए यहां अलग से सैनिक रेजीमेंट हो यहां सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूत मेजर सोमनाथ,धन सिंह थापा,मेजर संजय,कैप्टन विक्रम बत्रा हैं जिन्होंने इतिहास में नाम दर्ज करवा दिया है।
वेटरन्स की सीएसडी डिपो के लिए मांग हिमाचल में डिपो नहीं-
प्रदेश में पूर्व सैनिकों की सीएसडी कैंटीन में सामान उपकरण आदि अंबाला कैंट जालंधर और पठानकोट कैंट के सीएसडी डिपो से लाना पड़ता है क्योंकि प्रदेश में कहीं भी आज तक एक डिपो नहीं खोला है दूर से सामान लाने से दूसरे राज्यों का टैक्स वाहन व मजदूरी का खर्च लगने से हिमाचल में कैंटीन में समान दूसरे राज्यों को अपेक्षा महंगा खरीदना पड़ता है।
कहां से कितने पूर्व और सर्विंग सैनिक
हिमाचल के कांगड़ा जिला से 65073 पूर्व सैनिक जबकि 38000 सर्विंग सैनिक, हमीरपुर जिला से 29243 और 23 हजार, मंडी जिला से 18865 और 11 हजार, बिलासपुर जिला से 10984 और 7 हजार, शिमला जिला से 4565 और 3 हजार और कुल्लू जिला से 1573, ऊना जिला से कुल पूर्व सैनिक 16045 और तीनों सेनाओं व अर्धसैनिक बलों में कार्यरत 8 हजार सैनिक हैं। अ प्रदेश में 1 लाख 50 हजार 528 पूर्व सैनिक व वीर नारियां हैं जबकि करीब 1 लाख 40 हजार सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत हैं।
हिमाचल सैनिक रेजीमेंट खड़ी करने की मांग लंबे समय से उठती तो रही, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर पाई
प्रदेश का देश भर में दुश्मनों के दांत खट्टे करने के लिए अपना एक नाम है देश भर के 21 परमवीर चक्र विजेताओं में अकेले 4 हिमाचल के नाम है जिनमें कांगड़ा से सोमनाथ शर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा शिमला से, कैप्टन विक्रम बत्रा कांगड़ा से व अभी सर्विंग में सूबेदार मेजर संजय कुमार बिलासपुर को परमवीर चक्र मिल चुका है हिमाचल के बहादुरों को परमवीर चक्र 4, महावीर चक्र 10, अशोक चक्र 2, कीर्ति चक्र 19, बहादुर मेडल 1100 प्रदेश के नाम है सेना में भर्ती कोटे को जनसंख्या के आधार पर तय किया है जाहिर है इस कारण बड़े प्रदेशों को लाभ तो मिलता है लेकिन हिमाचल को इसका लाभ नहीं मिल पाता।
हिमाचल रेजीमेंट तक सेना में नहीं है जबकि छोटे राज्यों नागालैंड, असम, लद्दाख, गढ़वाल, कुमाऊं, जैक राइफल, जाट रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट, पंजाब रेजीमेंट व बिहार आदि राज्यों की अपनी रेजीमेंट है संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन जेसीओ ओआर के प्रदेश अध्यक्ष वैटरन कैप्टन बालक राम शर्मा ने कहा कि हिमाचल के नाम पर अलग सैनिक रेजीमेंट की मांग को रक्षा मंत्रालय तक के उठाया, लेकिन अभी तक भी यह मांग पुरी नहीं हो पाई।
प्रदेश के युवाओं के लिए सैनिक रेजीमेंट बन जाने के लिए तात्पर्य है और अपना पसीना बहाते रहते हैं, लेकिन अग्निपथ जैसी योजना से उन्हें निराशा हाथ लगी है। सीएसडी कैंटीन का डिपो भी ना प्रदेश में नहीं है, ये होना बहुत आवश्यक है। हिमाचल प्रदेश के वैटरन सैनिकों की मांग है कि बाहर के डिपो से जो सम्मान लाया जाता है मंहगा मिलता है। कैंटीन डिपो हिमाचल प्रदेश में जरूर होना चाहिए इसकी मांग भी लंबित है।

