हिमाचल: काँगड़ा के “हरजीत” ने भिखारी के ताने से बेपरवाह होकर विश्व पटल पर चमकाया नाम

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पालमपुर – बर्फू

हिमाचल के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के हरजीत कुमार की कहानी एक साधारण युवा के असाधारण साहस, परिश्रम और लगन से जुडी है। जीवन की विकट परिस्थितियों को मात देते हुए विश्व पटल पर देश व प्रदेश की कीर्ति स्थापित कर हरजीत युवाओं के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

हरजीत हमें यह याद दिलाते हैं कि कठिन परिश्रम व लगन से जीवन की कठिन परिस्थितियों को पार कर विजय प्राप्त की जा सकती है। जीवन में एक ऐसा भी समय आया जब हरजीत को भिखारी के ताने सुनने पड़े लेकिन वो इससे बेपरवाह मंजिल की तरफ बढ़ता रहा।

हरजीत कांगड़ा के बैजनाथ की ग्राम पंचायत धानग के गांव बडुआँ के रहने वाले हैं। किसान परिवार से संबंध रखने वाले हरजीत कुमार को बचपन से ही पढ़ाई के साथ कराटे का शौंक था।

विश्व विख्यात खिलाड़ी तथा अभिनेता ब्रूस ली की फिल्मों से प्रेरित हरजीत, कराटे के अच्छे खिलाड़ी बनकर देश का नाम विश्व पटल पर कमाना चाहते थे। ये सपना मेहनत की बदौलत वर्ष 2016 तथा 2017 में जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका तथा फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका में, क्रमश: रजत एवं कांस्य पदक जीत कर पूरा हुआ।

उनके खिलाड़ी बनने तक का सफर आसान नही था। सन 2002 में पारिवारिक समस्याओं के चलते, पढ़ाई बीच मे छोडक़र, सर्विस सेंटर में सहायक की नौकरी करनी पड़ी। उसी दौरान उनके एक साथी के भाई के कराटे कोच होने की जानकारी मिली।

20 दिन का प्रशिक्षण लेने के बाद हरजीत गाजियाबाद में नॉर्थ इंडिया यतोसे चैलेंज-डू खेलने गए। इसमें ब्रांज मेडल जीता। लेकिन घरेलू स्तर पर उनके सामने ज्यादा बड़ी चुनौतियां थीं। मां की बीमारी के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।

इसका असर उनके खेल जीवन पर भी पड़ने लगा। उनकी जीवन संगिनी की प्रेरणा से वर्ष 2014 में द्वितीय डॉ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में उन्हें स्वर्ण पदक मिला।

इसके बाद हरजीत दिल्ली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय मार्शल आर्ट्स गेम्स-2016 में स्वर्ण पदक जीतकर दसवीं विश्व मार्शल आर्ट्स गेम्स-2016, दक्षिण अफ्रीका” प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए। आर्थिक तौर पर अत्यधिक कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हरजीत के लिए रास्ता आसान नहीं था।

प्रतियोगिता के लिए धन की आवश्यकता पड़ने पर बैजनाथ, पपरोला, पालमपुर शहरों की सभी दुकानों और आस-पास के स्कूलों में धन मांग कर जमा करना पड़ा।

स्कूल के बच्चों और मजदूरों ने प्रसन्नतापूर्वक योगदान दिया। वहीं कुछ लोगों ने बातें भी बनाई कि भिखारियों को पैसे क्यों दें। देश का नाम रोशन करके क्या मिलेगा? बहुत देखे हैं, हमने क्या मिला उनको? लेकिन इस सबसे बेपरवाह हरजीत को मात्र यही स्मरण था कि कैसे भी करके देश का नाम रोशन किया जाए।

हरजीत की लगन, काबिलियत और दृढ़ संकल्प को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के मीडिया समूह ने लगातार दो महीने तक हरजीत की बात आमजन तक पहुंचाई। नतीजतन बहुत से लोग सहायता के लिए आगे आए और हिमाचल का यह सितारा दक्षिण अफ्रीका में रजत पदक जीतकर, देश और प्रदेश की रोशनी पूरी दुनिया में बिखेर आया।

दूसरी विश्व मार्शल आर्ट्स खेलों के समय फोकस हिमाचल मीडिया समूह, समाज सेवी संस्था गोद, हिमाचल व राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने हरजीत कुमार के खेल के सपने को पूरा करने के लिए सहायता की।

खेलों के अलावा हरजीत सामाजिक कार्यों में भी अग्रणी

कोरोना काल के समय निफ़ा हिमाचल (सामाजिक संस्था) के अंतर्गत, प्रशासन के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े और पहले क्वारंटीन केंद्र राधा स्वामी सत्संग परौर में कई महीनों तक नि:शुल्क सेवाएं दी। इसी दौरान उनके बड़े भाई स्वर्ग सिधार गए, तब भी हरजीत ग्रामीण अंचलों में सैनिटाइजऱ का छिडक़ाव, लोगों में कोविड संबंधित नियमों एवम् बचाव के प्रति जागरूकता फैलाते रहे।

स्वयं सेवियों के साथ मिलकर, प्रशासन व जनता के बीच सेतु का कार्य करते रहे कोरोना की दूसरी लहर में टीम टेन और सार्थक संस्था की एम्बुलेंस चलाकर कोरोना मरीजों को उनके घर से अकेले ही अस्पताल पहुंचाकर जान बचाई।

जिन मरीजों की कोरोना से देहावसान हुआ उनके पार्थिक शरीरों को एम्बुलेंस में अकेले ही शमशान घाट तक पहुंचाया। आपातकालीन परिस्थितियों में हरजीत ने अठारह बार रक्तदान कर मानवीय जीवन बचाए। कई युवाओं ने इनसे प्रेरित होकर रक्तदान प्रारंभ किया।

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