हिमाचली लोक गायक आर्य भरमौरी : गद्दी संस्कृति की नई आवाज़
चम्बा – भूषण गुरूंग
हिमाचल प्रदेश की धरती अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और लोकसंगीत की मधुर परंपरा के लिए जानी जाती है। इसी लोकधारा में हाल के वर्षों में एक नया नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—आर्य भरमौरी।
चंबा जिले की भरमौर तहसील के गाँव गोसन के रहने वाले आर्य भरमौरी अपनी गद्दियाली गायकी और लोकधुनों से श्रोताओं का दिल जीत रहे हैं।
शिक्षा अधूरी रही, पर नहीं टूटा जुनून
आर्य भरमौरी ने प्रारंभिक शिक्षा गाँव कंडी से तथा माध्यमिक शिक्षा जाच्छ से प्राप्त की। बाद में उन्होंने राजकीय डिग्री कॉलेज नूरपुर से बीए म्यूजिक की पढ़ाई शुरू की, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी। पढ़ाई का सिलसिला भले ही थम गया, मगर संगीत के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।
गीतों में झलकती है गद्दी संस्कृति
उनके गीतों में गद्दी समुदाय की झलक, गद्दियाली बोली की मिठास और पारंपरिक लोकधुनों की रौनक दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी गायकी सिर्फ चंबा तक सीमित नहीं रही, बल्कि कांगड़ा और पूरे हिमाचल में लोकप्रियता हासिल कर रही है।
मंच और दूरदर्शन तक पहुंच
आर्य भरमौरी कई स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं और हर बार श्रोताओं से खूब सराहना प्राप्त की है। हाल ही में उन्होंने दूरदर्शन शिमला के लोकप्रिय कार्यक्रम “नमस्ते हिमाचल” में भी प्रस्तुति दी, जहाँ उनकी आवाज़ और गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उद्देश्य – संस्कृति को जीवित रखना
आर्य भरमौरी का कहना है कि लोकगीतों की ताक़त उनकी सादगी और आत्मीयता में होती है। वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति, बोली और लोकगीतों से जुड़ी रहे ताकि हिमाचल की यह अनमोल धरोहर आगे भी जीवित रह सके।