गंगटोक – व्यूरो रिपोर्ट
देश में जहां बढ़ती जनसंख्या को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं एक राज्य ऐसा भी है, जिसकी चिंता बिलकुल इसके उलट है। हम बात कर रहे हैं सिक्किम राज्य की, जहां प्रजनन दर बेहद कम हो गई है, जिससे राज्य चिंता में डूब गया है। हालांकि सरकार ने प्रजनन दर बढ़ाने के लिए कई सुविधाएं देने का ऐलान भी किया है, लेकिन हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं।
सरकार ने फर्टिलिटी रेट बढ़ाने के लिए सरकारी महिला कर्मचारियों को कई सुविधाएं देने की घोषणा की है। मसलन दूसरा बच्चा पैदा होने पर महिला कर्मचारियों को एक साल की छुट्टी देगी। साथ ही सैलरी भी बढ़ाई जाएगी। हालांकि घोषणाओं पर अमल भी हो गया है, लेकिन फिर भी सरकार चिंता में है।
मौजूदा समय में सिक्किम की जनसंख्या सात लाख से भी कम है और कुल प्रजनन दर गिरकर 1.1 रह गई है, जो कि बेहद चिंता का विषय है।
इसी के चलते सिक्किम सरकार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से पिछले कुछ समय से राज्य में कम प्रजनन क्षमता की समस्या को लेकर विश्व बैंक प्रायोजित अध्ययन कर रही है।
एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अध्ययन में अनुसंधान प्राथमिकता की पहचान और राज्य में घटती प्रजनन दर को समझने के लिए रोडमैप तैयार करने के लिए सोमवार को यहां विशेषज्ञ समूह की बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव वीबी पाठक ने दिन भर चली चर्चा के उद्देश्यों और परिणामों के बारे में बताया कि यह बहुत चिंता का विषय है कि सिक्किम की कुल प्रजनन दर गिर 1.1 रह गई है। प्रतिस्थापन दर 2.1 है। शहरी दर 0.8 है, और ग्रामीण दर 1.2 है।
उत्तर पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह की प्रवृत्ति रही तो आशंका है कि एक दिन आएगा कि जन्म दर शून्य हो जाएगी। राज्य सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में समर्थन के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से संपर्क किया था।
इस पर रिपोर्ट चार महीने में तैयार हो जाएगी। आईसीएमआर के प्रजनन, बाल स्वास्थ्य और पोषण प्रभाग की प्रमुख भारती कुलकर्णी ने कहा कि राज्य सरकार को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। कम प्रजनन क्षमता के कारणों की पहचान करने के लिए एक बहु-विषयक टीम का गठन किया जाएगा।
राज्य योजना एवं विकास विभाग की अतिरिक्त सचिव रोहिणी प्रधान ने कम प्रजनन दर और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए बताया कि विश्व बैंक परियोजना के तहत एक प्रस्तावित परियोजना का खाका तैयार किया जा रहा है।
सुश्री प्रधान ने कहा कि अध्ययन के लिए नौ प्राथमिकता वाले विभाग एक साथ आए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत हस्तक्षेप के लिए पहचाने गए क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य शामिल हैं। परिवार नियोजन की राष्ट्रीय नीति के तहत प्रजनन आंकड़ों पर भरोसा कर हम धारा के विपरीत जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि विश्व बैंक ने पहले केरल और कर्नाटक के साथ-साथ श्रीलंका में भी प्रजनन की कम दर पर अनुसंधान परियोजनाएं चला चुकी है। सिक्किम में हालांकि यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है।