सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बच्चों से जुड़ा पोर्न देखना, डाउनलोड और पब्लिश करना अपराध

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दिल्ली – नवीन चौहान

चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि चाइल्ड पोर्न देखना, डाउनलोड करना और प्रकाशित करना अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में गंभीर गलती की है। हम इसे खारिज करते हैं और केस को वापस सेशन कोर्ट भेजते हैं।

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि POCSO एक्ट में चाइल्ड पोर्नोग्राफ की जगह चाइल्ड सेक्शुअली अब्यूजिव एंड एक्सप्लोइटेटिव मटीरियल लिखा जाए। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस डेबी पादरी वाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने की।

बता दें कि जनवरी 2024 में मद्रास हाईकोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ यह कहते हुए केस रद्द कर दिया था कि उसने चाइल्ड पोर्न सिर्फ डाउनलोड किया है, किसी को भेजा नहीं है। शख्स पर चाइल्ड पोर्न देखने और डाउनलोड करने का आरोप था। हाईकोर्ट के जस्टिस वेंकटेश ने कहा था कि केवल चाइल्ड पोर्न देखना पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

उनके मुताबिक यदि बच्चे को पोर्नोग्राफी में इस्तेमाल किया जाता है तो उसपर पॉक्सो एक्ट के तहत केस चलाया जा सकता है। यदि कोई इसमें बिना शामिल हुए केवल चाइल्ड पोर्न देखता है तो उसपर आपराधिक मामला चलाना सही नहीं है।

कोर्ट ने शख्स ने इस तरह की सामग्री न तो पब्लिश की है और न ही किसी को भेजी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली कई संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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