सावन का महीना इस वर्ष 4 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस वर्ष सावन का अधिकमास रहेगा। हिन्दू पंचांग में हर बार करीब तीन साल बाद अधिकमास आता है। इस बार सावन में अधिकमास का अद्भुत संयोग 19 साल बाद बन रहा है। इस साल 58 दिनों तक श्रद्धालुओं पर भगवान शिव पार्वती की कृपा रहेगी। इससे पहले 2004 में सावन का अधिकमास था।
व्यूरो रिपोर्ट
भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती को अर्पित सावन का महीना इस वर्ष 4 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस वर्ष सावन का अधिकमास रहेगा। हिन्दू पंचांग में हर बार करीब तीन साल बाद अधिकमास आता है।
इस बार सावन में अधिकमास का अद्भुत संयोग 19 साल बाद बन रहा है। इस साल 58 दिनों तक श्रद्धालुओं पर भगवान शिव पार्वती की कृपा रहेगी। इससे पहले 2004 में सावन का अधिकमास था।
भगवान शिव का प्रिय अधिक मास भी इसी दौरान पड़ रहा है। ऐसे में 18 जुलाई से 16 अगस्त के बीच पड़ने वाले सावन के सोमवार काफी महत्वपूर्ण होंगे। सावन महीना इस वर्ष 4 जुलाई से 31 अगस्त तक चलेगा। श्रद्धालु इस बार भगवान शिव की उपासना कर सुख-समृद्धि की कामना कर सकेंगे।
सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत खास रहता है। इस बार सावन का महीना पूरे दो महीने का होगा। इस वर्ष मलमास लगने के कारण सावन 58 दिनों का हो गया है। ऐसे में शिव भक्तों को सोमवार के दिन महादेव की उपासना करने के लिए पूरे 8 सोमवार मिलेंगे।
सावन मास पूरा महादेव को समर्पित है, लेकिन अधिकमास के स्वामी श्रीविष्णु हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस बार सावन में पड़ने के कारण यह अधिकमास और भी विशेष हो गया है, इस मास में जो भी व्यक्ति निष्ठापूर्वक भगवान का चिंतन करते हैं उन पर हरि और हर दोनों की कृपा बनी रहती है।
ये होता है मलमास या पुरुषोतम मास
पंडित भवानी दत्त शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार तीन साल में एक बार मलसास पड़ता है। इसे अधिक मास या पुरुषोतम मास भी कहते हैं। जिस चंद्र मास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, उस मास को मलमास कहते हैं। मलमास पड़ने के कारण पूरे एक महीने शुभ कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं।
मलमास में नामकरण, यज्ञोपवित संस्कार भी नहीं किए जाते हैं। मलमास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस अवधि में विष्णु भगवान की उपासना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। घर में सत्यनारायण की कथा करवाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
सावन का पवित्र महीना शिवजी को है प्रिय
पंडित भवानी दत्त शर्मा बताते हैं कि सावन का पवित्र महीना शिवजी को बहुत ही प्रिय है। इस महीने में प्रतिदिन पूजा पाठ करने से संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होतीं हैं। हर सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भगवान भक्तों की हर कामनाएं पूरी करते हैं।
इस बार 16 जुलाई को कर्क संक्रांति और 18 से सावन का अधिकमास शुरू हो रहा है। 16 अगस्त को अधिकमास खत्म हो जाएगा और 17 अगस्त को सिंह संक्रांति रहेगी।
19 वर्ष बाद सावन में अद्भुत संयोग बन रहा है, इसमें हरि और हर दोनों की भक्तों पर असीम कृपा बनी रहेगी। इस माह में सत्यनारायण की कथा व पूजा-पाठ अधिक फलदायी माने जाते हैं।

