
शाहपुर- नितिश पठानियां
हर इंसान की यही इच्छा होती है कि उसका बुढ़ापा सुख में बसर हो जाए, लेकिन जब 92 साल की उम्र में जीवन के अंतिम दिन बरामदे में काटने पड़े तो इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है।
ऐसा ही एक मामला विधानसभा क्षेत्र शाहपुर में सामने आया है। 92 वर्षीय बुजुर्ग महिला छह साल से सर्दी, गर्मी और बरसात हर मौसम में बरामदे में रहने को मजबूर है। नगर पंचायत शाहपुर की कौशल्या देवी ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। सभी मेहनत मजदूरी करते हैं।
उनके एक बेटे ने शाहपुर में एक बैंक की शाखा से 2004 में पांच लाख रुपये का लोन लिया था। बीमारी के चलते वह ऋण नहीं चुका पाए। 2015 में बैंक ने पूरे स्लेटपोश मकान को सील कर दिया। अब वह अपने बेटे के साथ हर मौसम में बरामदे में रहने को मजबूर है। वह बरामदे में ही खाना बनाते ओर सोते हैं।
उन्होंने बताया कि वह बीपीएल परिवार से संबंध रखते हैं। अभी तक सरकार की तरफ से उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अधीन मकान भी नहीं मिला है।
उन्होंने सरकार और बैंक से गुहार लगाई है कि एक कमरे और रसोई का ताला खोल दिया जाए, ताकि वह अपने जीवन के अंतिम क्षण अपने घर में काट सके। उन्होंने कहा कि बैंक के जो भी पैसे हैं वह किस्तों में चुकाने को भी तैयार हैं।
क्या कहते हैं बैंक मैनेजर
बैंक के मैनेजर गंधर्व नाग ने बताया कि उनकी कुछ दिन पहले ज्वाइनिंग हुई है। यह मामला उनके ध्यान में नहीं है। मकान क्यों सील किया है, इसको लेकर जांच की जाएगी। मामले की जांच करके उचित करवाई की जाएगी।
