शराब की दस करोड़ बोतलों से आएगा एक अरब मिल्क सेस, हर साल दारू की नौ करोड़ बोतलें पी जाते हैं हिमाचली

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आबकारी नीति में सरकार ने तय किया है दस रुपए दूध कर, हर साल दारू की नौ करोड़ बोतलें पी जाते हैं हिमाचली।

शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल में शराब पर लगे दूध सेस से राज्य सरकार ने सौ करोड़ की आय का अनुमान तय किया है। अप्रैल में शुरू हुई बिक्री के साथ ही यह सेस प्रति बोतल लगना शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने शराब से दूध सेस के तौर पर राजस्व जुटाने का तरीका ढूंढा है।

इस बार आबकारी एवं कराधान विभाग ने शराब कोटे में बढ़ोतरी की है। साथ ही यह भी तय कर दिया है कि शराब ठेकेदारों को अपने तय कोटे का कम से कम 80 फीसदी उठाना ही होगा। यानि शराब की बिक्री न भी हो पर 80 फीसदी कोटे तक दूध सेस प्रति बोतल के हिसाब से आबकारी एवं कराधान विभाग वसूल करेगा।

फिलहाल, हिमाचल के आंकड़े देखें, तो प्रदेश में करीब नौ करोड़ बोतल की औसतन खपत होती रही है। हालांकि इस बार आंकड़ा दस करोड़ के पार जाने की संभावना है। दस करोड़ बोतल शराब की बिक्री मौजूदा वित्तीय वर्ष में होती है, तो सीधे-सीधे सौ करोड़ रुपए सरकारी खजाने में जमा हो जाएंगे।

बिक्री 80 फीसदी तक रहती है, तो 20 करोड़ रुपए का नुकसान राजस्व में जरूर होगा। हालांकि अभी बेहद शुरुआती स्थिति है और तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। गौरतलब है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आबकारी विभाग की पॉलिसी में बदलाव किया गया है।

सरकार ने करीब पांच साल बाद शराब के ठेकों की भी नीलामी की है। पहली बार दूध सेस को शराब की बोतल के साथ जोड़ा गया है, जबकि इससे पूर्व पंचायत, एंबुलेंस और गोसदनों के लिए सेस शराब पर वसूला जा रहा था। इन सभी को मिलाकर एक बोतल पर अब 17 रुपए सेस बन रहा है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट के दौरान भी 100 करोड़ रुपए की आय का खुलासा किया था। इस आय को हासिल करने के लिए प्रदेश में 10 करोड़ बोतलों की बिक्री होना आवश्यक है। आबकारी एवं कराधान विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए ताकत झोंकी है।

यही वजह है कि शराब के ठेके हासिल करने वालों के लिए 80 फीसदी तक कोटा हर हाल में उठाने का नियम तय कर दिया गया है। आबकारी एवं कराधान विभाग के माध्यम से हासिल होने वाली इस आय को राज्य सरकार पशुधन सुधार और दुग्ध उत्पादन में खर्च करने वाली है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ग्रीन बजट में आयकर बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम दूध सेस को बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व इस माध्यम से प्राप्त करेगी और इस राशि को प्रदेश के विकास पर खर्च किया जाएगा।

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