
प्रागपुर-आशीष कुमार
विश्व हिंदू परिषद की बैठक जिला कांगड़ा के सह संगठन मंत्री कुलदीप राणा की अध्यक्षता में कालीनाथ मंदिर स्थित कालेश्वर महादेव के प्रांगण में संपन्न हुई। बैठक में सनातन धर्म को बचाने के लिए विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। बैठक में मोदी सरकार से मांग की गई कि भारत के हर जिले में गुरुकुल खोले जाएं, क्योंकि हजारों साल पहले ही वेदों पुराणों के माध्यम से हमारे ऋषि मुनियों ने आध्यात्मिक ज्ञान के बल पर ही 9 ग्रहों की खोज, चाल तथा सितारों की गणना कर ली थी।
उस समय विज्ञान नाम की कोई चीज नहीं थी। इस अवसर पर कालेश्वर महादेव के प्रमुख स्वामी विश्वानन्द सरस्वती ने कहा गुरुकुलों में शिक्षित हमारे ऋषि मुनि मंत्रोच्चारण से ही आग जला देते थे और काल गणना में भी माहिर थे, जोकि वेदों पुराणों में वर्णित है।
ईश्वर को पाने के लिए हम इधर उधर धर्म गुरुओं के पास भटकते फिरते हैं जबकि वेदों पुराणों में ही भगवान से मिलने के तरीके बताए गए हैं लेकिन आज वेद पुराणों का ज्ञान देने वाले बहुत कम लोग हैं। जो हमें भगवान को पाने के तरीके पढ़ा सके, जो यह सब कुछ आज भी संभव है बस जरूरत है तो गुरुकुल खोलने की।
गुरुकुलों में आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ विज्ञानात्मक ज्ञान भी दिया जाता था। हमारे ऋषि मुनि बिना किसी खर्चे के आध्यत्मिक शक्ति से जमीन में पानी की खोज कर लिया करते थे। व्यास ऋषि ने आध्यात्मिक शक्ति से ही रोहतांग पर्वत की चोटी पर पानी की खोज की थी ,जोकि व्यास नदी के नाम से विश्व विख्यात हुई है, जबकि आज के वैज्ञानिक युग में पानी की खोज करने के लिए लाखों खर्च करने के बाद भी कई बार निराशा ही हाथ लगती है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुगल तथा ब्रिटिश दोनों ही सनातन यानी हिंदू विरोधी थे, जिन्होंने सनातन धर्म का नामोनिशान मिटाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है। लेकिन हमारे सनातनियों द्वारा दिए गए बलिदान के कारण ही आज भी सनातन धर्म जीवित है।
हिंदू धर्म आज भी सभी धर्मों से सर्वोपरि है। लेकिन आज जरूरत है हिंदू धर्म के प्रति सचेत व जागरूक होने की,आज जरूरत है जाति भेदभाव को भुलाकर एकजुट होने की। हिन्दू धर्म को बचाने की खातिर हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गए बलिदान को व्यर्थ न जाने दिया जाए।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के जिला कांगड़ा विभाग के सह संगठन मंत्री कुलदीप राणा, परागपुर खंड के अध्यक्ष तिलकराज, स्वामी विश्वानन्द सरस्वती, नटराज शर्मा, विपन भारद्वाज, रमन पंडित, देशराज भाटिया, मुकेश शर्मा, गोपाल गिरी, राजेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
