
नूरपुर – देवांश राजपूत
फोरलेन संघर्ष समिति द्वारा प्रभावितों को उचित मुआवजा न मिलने के कारण वुधवार को समिति के सदस्य संयुक्त कार्यालय नूरपुर के बाहर एक दिन अनशन पर बैठे।
फोरलेन संघर्ष समिति का समर्थन करने के लिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय महाजन भी अनशन में पहुंचे।
अजय महाजन ने स्थानीय विधायक एवं वन मंत्री राकेश पठानिया पर हमला करते हुए कहा कि पठानिया फोरलेन प्रभावितों की मांग सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पाए।
महाजन ने कहा कि हाल में मुख्यमंत्री जयराम का नूरपुर दौरा था, लेकिन स्थानीय विधायक राकेश पठानिया ने फोरलेन प्रभावितों की मांगों को मंच से मुख्यमंत्री तक नही पहुंचाया।
महाजन ने पठानिया से पूछा कि जनसभा में मंच पर जब क्षेत्र की अन्य मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रख रहे थे, तो क्या पठानिया को फोरलेन प्रभावितों की याद तक नहीं आयी।
महाजन ने कहा कि पठानिया कई बार फोरलेन प्रभावितों को आश्वासन के तौर पर एक प्रोजेक्ट एक रेट दिलाने का वायदा कर चुके है लेकिन इस मुद्दे पर कभी भी सरकार के समक्ष आवाज नही उठा सके।
महाजन ने कहा कि फोरलेन प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार द्वारा गठित की गई उप कमेटी में पठानिया भी सदस्य है लेकिन फोरलेन प्रभावितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
फोरलेन समिति ने सरकार के समक्ष यह रखी मांगे
प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू-अर्जन अधिकारी नूरपुर द्वारा अवार्ड नम्बर 1 तथा अवार्ड नम्बर 2 के अंतर्गत किए गए मुआवजे का अंतर बिना आर्बिटेशन के बराबर किया जाए।
भवन मुआवजे में पूरे भवन का मुआवजा दिया जाए जबकि एन.एच. ए. आई. द्वारा उतने ही भवन का मुआवजा दिया जा रहा है जितना फोरलेन की जद में आ रहा है जोकि अन्याय पूर्ण है जोकि प्रभावितों को अस्वीकार है।
प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू अर्जन अधिकारी नूरपुर द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि तथा भवनों के अवार्ड पत्र भूमि व मकान का नक्शा और राशि की विस्तृत जानकारी प्रत्येक प्रभावित के पते पर उपलब्ध कराई जाए।
भू अधिग्रहण कानून 2013 को अतिशीघ्र लागू किया जाए।
भू अर्जन अधिकारी नूरपुर द्वारा प्रभावितों को जो 60 दिन का नोटिस दिया जा रहा है उसे तब तक निरस्त किया जाए।
जब तक प्रथम व द्वितीय अवार्ड की राशि का अंतर पूरा नहीं किया जाता तब तक भवन खाली करने का कोई औचित्य नही बनता।
ये रहे मोजुद
इस अवसर पर फोरलेन समिति के अध्यक्ष दरबारी सिंह, उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा, सचिव बी.पी. बक्शी, डा. अशोक शर्मा, कर्नल दीपक पठानिया, राम चन्द्र शास्त्री, सरदार सिंह, ईश्वर शर्मा व अन्य पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे।
