रानीताल-32 मील मार्ग पर कुठेड़ में बनी वर्षाशालिका दे रही हादसों को न्योता

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रेन शेल्टर का प्लास्टर उखड़ा दीवारों में बड़ी बड़ी दरारें, अब तो आश्रय लेने से भी कतराने लगे लोग

कोटला – स्वयम

ज्वाली उपमण्डल के तहत रानीताल 32 मील मार्ग कुठेहड़ चौंक पर बनी वर्षाशालिका इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी गिर सकती है। वर्षाशालिका की हालत इतनी खस्ता है कि लोग इसके अंदर जाने से भी कतराते हैं।

इस वर्षाशालिका की छत का पलस्तर भी गिर रहा है और दीवारों में भी दरारें पड़ गई है और जब कभी बारिश होती है तो जितना पानी बाहर सड़क पर होता है, उससे कहीं अधिक इस वर्षाशालिका के अंदर होता है। वही इसमें सफाई तो न के बराबर है।

वहीं कुठेहड़, नढोली के बीडीसी सदस्य सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि हमने पहले भी कई बार इस वर्षाशालिका की मुरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग ज्वाली को आगवत करवा चुके हैं और आज तक विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगी, या यूं कहें कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

वहीं इतना समय बीत जाने के बाद भी वर्षाशालिका की मुरमत नहीं हो सकी वहीं यात्रियों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे कई घंटों तक बस के इंतजार में परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं इन दिनों सर्दियां का मौसम है वर्षशालिका ही ऐसी जगह होती है यहां लोग आराम से खड़े होकर बसों का इंतजार कर सकते हैं लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि लोग मजबूरन बाहर खड़े होकर परेशानियां झेलते हैं।

वहीं बसों के इंतजार में बीमार व्यक्तियों, बच्चों व महिलाओं समेत अन्य लोगों को कड़ाके की ठंड में बाजार की दुकानों के नीचे सिर छुपाना पड़ रहा है जिस कारण दुकानदारों की दुकान में भारी भीड़ हो जाती है जिससे वह ग्राहकों को समान नहीं दे पाते।

एसडीओ राजेश मांटा के बोल

इस बारे में लोक निर्माण विभाग कोटला के एसडीओ राजेश मांटा से बात हुई उन्होंने बताया कि वर्षालय का टेंडर कर दिया गया है लेकिन साथ लगते सफेदे के पेड़ को काटने के लिए वन विभाग को लिखा है लेकिन आज तक उन्होंने इसे नहीं काटा जिस बजह से काम रुका हुआ है।

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