ऊना – अमित शर्मा
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला मुख्यालय के थाना सदर में हजारों लोगों की सुरक्षा पुख्ता करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की अपनी ही सुरक्षा पुख्ता नहीं है. हालत यह है कि सन 1865 से बने भवन में चल रहा सदर थाना अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है.

यहां तक कि थाना परिसर का कारागार, मैस और पुलिस कर्मचारियों के रेस्ट रूम बढ़ से बदतर हालत में पहुंच चुका है. हालांकि, थाने के लिए भूमि चिन्हित हुए भी किए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है.

थाना परिसर के हालात ऐसे हैं कि जगह-जगह से दीवारें टूटने के चलते बड़ी दरारें आ चुकी हैं. यहां तक की कई जगह से दीवार और छत का संपर्क भी टूट चुका है, इसके चलते एक तरफ जहां इस भवन के गिरने का खतरा हर समय बना रहता है. वहीं दूसरी तरफ विषैले जीव जंतु अक्सर थाना परिसर में पहुंचकर पुलिस कर्मचारियों का सिर दर्द बढ़ा देते हैं.

सन 1865 से बना ऊना सदर थाने का भवन बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुका है. थाना परिसर में कई जगहों पर दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आर पार का नजारा साफ तौर पर दिखाती हैं. बेहद दयनीय हालत में पहुंच चुके इस बेहद पुराने भवन में पुलिस कर्मचारियों को न सिर्फ ड्यूटी करने को मजबूर होना पड़ता है, बल्कि उनका रहना और खाना भी हर वक्त खतरे के साए में होता है.

यहां तक कि इन्हीं दरारों से होकर कई बार सांप-बिच्छू जैसे विषैले जीव पुलिस कर्मचारियों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं. शहर के बीचो-बीच यह बेहद पुराना भवन इस्तेमाल के बावजूद लगातार खंडहर बनता जा रहा है.

कई साल पहले थाना के नए परिसर का निर्माण करने के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई थी, लेकिन अभी तक उस भूमि पर निर्माण कार्य ही शुरू नहीं हो पाया. वहीं, दूसरी तरफ, वर्तमान थाना परिसर में मरम्मत तक नहीं की जा सकी है.

पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर का कहना है कि अधिकतर थाने और चौकियां निजी भवनों में किराए पर चल रहे हैं, जबकि थाना सदर का काम अंग्रेजों के ज़माने के भवन में चलाया जा रहा.है. समय के साथ ही भवन काफी जर्जर बन चुका है. सदर थाना के नए परिसर के निर्माण के लिए जगह का चयन किया जा चुका है. जल्द ही नए भवन का निर्माण कर इसे शिफ्ट भी किया जाएगा.

