माउंट एवरेस्ट फतह कर लौटी कृतिका शर्मा, अपना ऑक्सीजन मास्क देकर बचाई शेरपा की जान

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे

कृतिका शर्मा जब माउंट एवरेस्ट फतह कर गृह जिला सिरमौर के पांवटा साहिब पहुंची तो उसका जोरदार स्वागत हुआ। एनसीसी कैडेट कृतिका की इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 4 अगस्त 2024 को हुई, जब उन्हें तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संजय शांडिल ने माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए चयनित किया।

कृतिका एनसीसी की कैडेट हैं और जिला सिरमौर के पांवटा साहिब कॉलेज की बीए सेकेंड ईयर की छात्रा है। 19 साल की कृतिका ने माउंट एवरेस्ट शिखर की सफल चढ़ाई पर फर्स्ट एचपी गर्ल्स बटालियन एनसीसी सोलन ने भी खुशी जाहिर की है। 1 एचपी गर्ल्स बटालियन एनसीसी, सोलन की ओर से बताया गया कि कृतिका ने 18 मई 2025 को माउंट एवरेस्ट के शिखर को सफलतापूर्वक फतह किया है।

गताधार की मूल निवासी कृतिका शर्मा माउंट एवरेस्ट को फतह करने के बाद पहली बार पांवटा साहिब पहुंचीं। कृतिका की एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर लेफ्टिनेंट पूजा भट्टी भी पांवटा साहिब में उनके साथ मौजूद रही। कृतिका खुली जीप में पांवटा साहिब बाजार से होते हुए पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस पहुंची, जहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कृतिका ने अपने अनुभवों को साझा किया। इस दौरान कृतिका के माता पिता भी भावुक नजर आए।

कृतिका शर्मा जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के गताधार के एक आम परिवार से संबंध रखती है। पांवटा साहिब पहुंचने पर कृतिका के माता-पिता, एनसीसी इंचार्ज डॉ. पूजा भाटी ने कृतिका की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। इस दौरान पांवटा साहिब कॉलेज की एनसीसी कैडेट्स ने वाई प्वाइंट से मुख्य बाजार होकर विश्राम गृह तक रैली निकाली।

कृतिका के माता-पिता का कहना है कि शुरुआती दौर में उन्हें लग रहा था कि बेटी को इस कठिन काम में डालकर उन्होंने कोई गलती कर दी है लेकिन कृतिका का हौसला देखकर उन्हें भी यकीन हो गया कि कृतिका माउंट फतेह करने के अपने लक्ष्य को जरूर पूरा कर पाएगी।

कृतिका शर्मा के बोल

कृतिका शर्मा ने माउंट एवरेस्ट शिखर की सफल चढ़ाई के दौरान एक घटना का जिक्र किया। कृतिका ने बताया कि वापस लौटते वक्त येलो बैंड स्थल के पास एक शेरपा (कुक) अचेत पड़ा हुआ था। वे दो अन्य साथियों के साथ पास पहुंचीं। हल्की सी हरकत हुई तो अपना ऑक्सीजन मास्क कुछ पल उसे दिया।

शेरपा के होश में आने पर उसे साथ वापस लाया और रास्ते में दूसरे ऑक्सीजन मास्क की व्यवस्था की। शेरपा की ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। हम समय पर नहीं आते तो उसकी जान भी जाने का खतरा था। क्योंकि इस कम ऑक्सीजन वाली जगह पर पहले ही माउंट एवरेस्ट फतह करने निकले तीन चार पर्वतारोही के शव पड़े हुए थे। वापस लौटते समय एक शेरपा की जान बचाने से माउंट एवरेस्ट फतह करने की खुशी भी दोगुनी हो गई।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पर्वतारोही दल 18 मई, 2025 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई के बाद 19 मई, 2025 को सुरक्षित रूप से एवरेस्ट बेस कैंप पर लौटा था।यह ऐतिहासिक उपलब्धि एनसीसी अभियान दल द्वारा माउंट एवरेस्ट पर तीसरी सफल चढ़ाई है, इससे पहले 2013 और 2016 में भी यह सफलता मिली थी।

इस वर्ष के अभियान की एक प्रमुख विशेषता ये थी कि दस सदस्यीय कैडेट टीम में नव प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पर्वतारोही शामिल थे, जिन्होंने कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया था और कठिन राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से उनका चयन किया गया था। टीम में बराबर संख्या में गर्ल्स और बॉयज कैडेट थे, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष थी. सबसे कम उम्र का कैडेट की आयु केवल 16 वर्ष थी।

माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने वाले कैडेट्स

  • कैडेट मोनिका, राजस्थान
  • कैडेट प्रतिमा राय, पश्चिम बंगाल
  • कैडेट रिफाइनेस वारजरी, मेघालय
  • कैडेट कृतिका शर्मा, हिमाचल प्रदेश
  • कैडेट आबिदा आफरीन, लद्दाख
  • कैडेट मोहित नथिया, जम्मू और कश्मीर
  • कैडेट पद्मा नामगेल, चंडीगढ़
  • कैडेट वीरेंद्र सिंह सामंत, उत्तराखंड
  • कैडेट सचिन कुमार, उत्तराखंड
  • कैडेट मुकुल बंगवाल, उत्तराखंड
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