मंत्रिमंडल में कांगड़ा-शिमला में कांटे की टक्कर

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दोनों जिलों को मिल सकते हैं तीन-तीन अहम ओहदे, खाली हाथ रह सकते हैं मंडी-लाहुल-स्पीति

शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल में मंत्रिमंडल की लड़ाई में शिमला और कांगड़ा में कांटे की टक्कर फिलहाल चल रही है। कांग्रेस सरकार इन दोनों जिलों को तीन-तीन पद बांट सकती है। इनमें से कांगड़ा के हिस्से दो मंत्री पद और एक अन्य बड़ी जिम्मेदारी आ सकती है, जबकि कांगड़ा का एक मंत्री पद संसदीय जिला चंबा के खाते में भी जा सकता है।

शिमला में मंत्रिपद की रेस में सबसे ज्यादा विधायक हैं। यहां कांग्रेस के सात विधायक हैं। इनमें से शिमला शहरी विधानसभा सीट को छोड़ दें, तो अन्य सभी छह मंत्री पद की रेस में शामिल हैं। हालांकि सरकार इस बार शिमला से तीन ही विधायकों को मंत्री पद दे सकती है।

शिमला के विधायकों के हिस्से चार अहम जिम्मेदारियां आ जाएंगी, लेकिन ऐसे हालात में छह में से दो विधायक जरूर छूट रहे हैं। इसके अलावा जिन जिलों के हिस्से एक-एक मंत्री पद आने वाला है, उनमें बिलासपुर, सोलन, कुल्लू, किन्नौर और सिरमौर जिला शामिल है। दरअसल, हमीरपुर से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हैं, जबकि ऊना से उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री हैं।

बिलासपुर में अभी तक कोई अहम जिम्मेदारी तय नहीं हुई थी। दिल्ली से शिमला तक मंत्रिमंडल को लेकर जिन बातों का जिक्र सामने आया है, उनमें चार जिले ऐसे हैं, जहां मंत्री पद मिलना अब मुश्किल है। इनमें मंडी, लाहुल-स्पीति के साथ ही हमीरपुर और ऊना का भी नाम शामिल है। हालांकि इन जिलों में अतिरिक्त जिम्मेदारियां जरूर विधायकों को दी जा सकती हैं।

मंडी के धर्मपुर में चंद्रशेखर पहली मर्तबा चुनाव जीते हैं और वह विधानसभा हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। बहरहाल, हिमाचल मंत्रिमंडल में दस विधायकों को जगह मिलना तय है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के भी दो पद होंगे। इतना ही नहीं, मौजूदा सरकार दो अन्य विधायकों के लिए मुख्य सचेतक और सचेतक के पद भी सृजित कर सकती है।

बहरहाल, अब तक मंत्रिमंडल की जो स्थिति बनी है उसमें 14 विधायक किसी न किसी अहम ओहदे पर नजर आने वाले हैं, लेकिन मुश्किल अब भी यही है कि जो विधायक रेस से बाहर हो रहे हैं, उनको कैसे संभालें। विधायक अपनी-अपनी दावेदारी दिल्ली तक जता चुके हैं।

सोलन से कर्नल धनीराम शांडिल तो खुद के लिए उपमुख्यमंत्री तक का ओहदा मांग चुके हैं। ये वे सवाल हैं,जिन पर मुख्यमंत्री समेत आलाकमान मंथन में जुटी है और यही वो बड़ा कारण भी है जिस कारण मंत्रिमंडल गठन की डेट लगातार बदल रही है।

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