
शिमला-जसपाल ठाकुर
राजधानी शिमला में भिखारियों व कान साफ करने वालों की संख्या लगातार बढ़ गई है। ऐसे में उपायुक्त आदित्य नेगी ने नगर निगम के आयुक्त को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि इन लोगों को शहर से बाहर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए या नगर निगम इन्हें कोई काम दे, ताकि इनकी आजीविका हो सके। वहीं उपायुक्त कार्यालय से आए पत्र के बाद नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने निगम कर्मियों को इस बारे में निर्देश जारी किए हैं।
शिमला के ओल्ड बस अड्डे, लोअर बाजार, रिज व मालरोड के अलावा शहर में जगह-जगह बिखारी जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, लोगों को खासा परेशान करते हैं। ये भिखारी अन्य राज्यों से आए हैं। शहर में अचानक ही इनकी संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा कान साफ करने का धंधा चलाने वाले झोलाछाप डाक्टर भी शामिल हैं। लोग इनसे खासे परेशान हो गए हैं। भिखारी मालरोड, स्कैंडल प्वांइट व बाजार में लोगों को तंग करते देखे जा सकते हैं।
नगर निगम के आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि त्योहारी सीजन में ज्यादातर भिखारी राजधानी की तरफ आते हैं, प्रशासन उन पर सख्ती से कार्रवाई करेगा। त्योहारी सीजन में करते हैं शिमला का रुख स्थानीय कालीबाड़ी मंदिर के समीप इनकी काफी संख्या देखने को मिल रही है। इनमें छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा है। त्योहारी सीजन में ये शिमला की ओर आते हैं। पर्यटक सीजन में सैलानी जब शिमला की सैर करने आते हैं तो सबसे पहले उनका सामना शहर के भिखारियों से ही होता है।
हालांकि प्रशासन ने भीख मांगने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद भिखारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें न तो किसी का भय है और न ही इन पर प्रशासन का डंडा चलता है। पूरा दिन ये भिखारी एक स्थान से दूसरे पर घूमते रहते हैं। कई भिखारी तो छीनाझपटी पर ही उतर आते हैं। ऐसे में मजबूरन लोगों को 10 या 20 रुपये देकर इनसे पीछा छुड़ाना पड़ता है।
