शूलिनी माता मंदिर प्रांगण में लगी रोक तीन दिन के भीतर हटाई, भक्तों ने प्रशासन के फैसले का किया था विरोध
सोलन – रजनीश ठाकुर
शूलिनी माता मंदिर प्रांगण में जिला प्रशासन द्वारा भजन-कीर्तन पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया गया है। लाखों लोगों की आस्था का केंद्र शूलिनी मां मंदिर में सोलन प्रशासन ने तीन दिन पूर्व कीर्तन करने पर रोक लगा दी थी। मंदिर में कई दशकों से कीर्तन चल रहा था।
प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ लोग लामबंद हो गए थे तथा विभिन्न सामाजिक व हिंदू संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध करना भी शुरू कर दिया था। आखिरकार अल्प समय में ही प्रशासन द्वारा अपने निर्णय को पलटना पड़ा तथा मंदिर के मुख्य द्वार पर चस्पा नोटिस बोर्ड को हटा दिया गया।
प्रशासन के मूल स्थिति के यथावत रखे गए निर्णय पर प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। देवभूमि क्षत्रिय संगठन के रुमित सिंह ठाकुर ने कहा था कि प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर में कीर्तन पर रोक लगाना निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि क्षत्रिय संगठन ने लगाई गई रोक को हटाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। मंदिरों में भजन कीर्तन पर रोक लगाने को उन्होंने लोगों की आस्था पर चोट करार दिया था। उन्होंने इस प्रतिबंध के खिलाफ लेकर लोगों और धार्मिक संगठनों की एकता की सराहना की है।
समाज सेवी मुकेश गुप्ता ने भी मंदिर परिसर में भजन कीर्तन पर रोक लगाने संबंधित निर्णय को लोगों की आस्था पर चोट करार देते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए मीडिया ग्रुप की सराहना की है।
सोलन के व्यवसायी सुमित खन्ना द्वारा भी जिला प्रशासन द्वारा मंदिरों में इस प्रकार के आदेशों का खंडन किया गया और गलत करार दिया गया था।
भाजपा के सह प्रवक्ता करण नंदा ने भी मंदिर में कीर्तन पर रोक लगाने को गलत करार देते हुए लाखों लोगों की आस्था को अघात पहुंचना बताया था।

