
चम्बा- भूषण गुरुंग
हरिद्वार में दादा की अस्थियां विसर्जित कर घर लौट रहे पिता-पुत्र की सड़क हादसे में हुई मौत परिवार को ताउम्र न भूलने वाले जख्म दे गई। हादसे में काल का ग्रास बने बुद्धि प्रकाश की मौत से जहां उसके दो बच्चों (15 वर्षीय बेटा और 12 वर्षीय बेटी) के सिर से बाप का साया उठ गया तो वहीं, मृतक की पत्नी गुड्डी देवी पर अब परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आन पड़ी है।
रोती-बिलखती गुड्डी देवी को समझ नहीं आ रहा है कि सुबह 11 बजे तक घर पहुंचने का बात कर रहे उनके पति और ससुर अब कभी भी घर की दहलीज नहीं लांघ पाएंगे। हादसे में दो लोगों की मौत की खबर पंचायत में आग की तरह फैल गई।
गांव की महिलाएं मृतकों के घर परिजनों को ढांढस बंधवाने के लिए पहुंचना शुरू हो गईं। मृतक की पत्नी को समझ नहीं आ रहा कि वह अपने उजड़े परिवार को संभाले या बच्चों को। शवों के घर पहुंचते ही चीखपुकार मच गई। मौके पर मौजूद ग्रामीण उस घड़ी को कोस रहे थे जब बुद्धि प्रकाश और उसके पिता दुर्घटना का शिकार बने।
सुंदरोता निवासी बुद्धि प्रकाश के तीन भाई और हैं। वह अपने दादा-दादी, माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग मकान में रहता था। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाला बुद्धि प्रकाश शिमला में काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।
बीते दिनों दादा की मृत्यु पर वह घर आया और अस्थियां विसर्जित करने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हरिद्वार रवाना हुआ था। बुधवार सुबह उसने घर फोन कर बताया कि दोपहर से पहले वे घर पहुंच जाएंगे लेकिन, उन्हें क्या पता था कि काल उनका चंबा के प्रवेशद्वार तुन्नूहट्टी में बाहें फैलाए इंतजार कर रहा है।
वीरवार को मृतकों का पैतृक श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम पंचायत कुठेड़ बुदौड़ा के उपप्रधान लाल चंद ने बताया कि मृतक निर्धन परिवार से ताल्लुक रखता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से उन्हें फौरी राहत प्रदान करने की मांग की है।
