प्रदेश विश्वविद्यालय चल रहा राम भरोसे : अभाविप

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प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति व स्थाई कुलसचिव की नियुक्ति आखिर कब, स्थाई कुलपति की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाए, छात्रों के साथ साथ गैर शिक्षक वर्ग भी हो रहा परेशान- अ•भा•वि•प•

शिमला – नितिश पठानियां 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जो की विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है अपने स्थापना काल से ही छात्रहि,त समाजहित और राष्ट्रहित के लिए काम करता आया है। ऐसे ही विद्यार्थी परिषद काफी लंबे समय से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ती की मांग उठा रहा है।

स्थाई कुलपति न होने की वजह से विश्वविद्यालय में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 3 सालों से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति न होने से छात्र वर्ग को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करने पड़ रहा है।

हिमाचल प्रदेश के दूर दराज चम्बा जैसे क्षेत्रों से आने वाले छात्र जब विश्वविद्यालय में किसी अनुमति पत्र को कुलपति से मिलने आता है तो उस छात्रों को बताया जाता है कि कुलपति महोदय धर्मशाला ने केंद्रीय विश्वविद्यालय में मौजूदा कुलपति होने के कारण धर्मशाला में हैं । ऐसे में कुलपति न होने के कारण विश्वविद्यालय में अराजकता का माहौल देखने को मिल रहा है।

वहीं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव का तबादला बीते दिनों हो चुका है ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक इस विषय पर भी कोई सुध नहीं की जा रही है ऐसे में विश्वविद्यालय का स्तर गिराने का प्रयास प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। गौरतलब बात है कि वर्तमान समय में जो प्रदेश के मुखिया ने भी इसी विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करी है।

प्रदेश सरकार के इस रवैए को देखते हुए प्रदेश भर के छात्रों में आक्रोश की भावना बनी हुई है वर्तमान सरकार एक शिक्षा विरोधी सरकार के रूप में उभरते हुए दुख रही है वर्तमान सरकार ने इस से पहले असंख्य शिक्षण संस्थानों को बंद कर ओर सरदार पटेल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के खेलने के बाद प्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालय को भी अछूता नहीं छोड़ा है।

प्रदेश सरकार की ऐसी नीति के कारण ही देश भर में हिमाचल प्रदेश की शिक्षा का स्तर तीसरे स्थान से फिसल कर 22वे स्थान पर पहुंच चुकी है।

विद्यार्थी परिषद का कहना है की प्रदेश सरकार छात्रों की मांगो को अनदेखा करके अपनी राजनीति चमकाने में लगी हुई है। परंतु न ही छात्रों की मांगो की सुनवाई की जारही है और न ही विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारियों की मांगो की सुनवाई की जारही है।

विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारियों के कामों को भी लंबे समय तक लटकाया जा रहा है। जिससे परेशान होकर गैर शिक्षक कर्मचारियों को विश्वविद्यालय प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ आज धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपना रोष व्यक्त करना पड़ रहा है। एवम विद्यार्थी परिषद के साथ साथ आज गैर शिक्षक कर्मचारी भी विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ति की मांग उठा रहे हैं।

हम देखते हैं पिछले दिनों शिक्षक वगैर शिक्षक कर्मचारी वेतन न मिलने को लेकर धरने पर थे जिसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षक व गैर शिक्षक वर्ग को वेतन दिया गया।

विश्वविद्यालय की नौकरानी द्वारा शिक्षक एवं गैर शिक्षक वर्ग वेतन न मिलने को लेकर धरना करने पर मजबूर हो रहा है यह सब स्थाई कुलपति वह स्थाई कुलसचिव के ना होने के कारण देखने को मिल रहा है।

विद्यार्थी परिषद का कहना है की ऐसी विकट परिस्थिति में विद्यार्थी परिषद छात्र वर्ग के साथ साथ गैर शिक्षकों के साथ भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा।

साथ ही साथ विद्यार्थी परिषद ने कहा की अगर समय रहते हमारी इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी परिषद जल्द ही एक बड़े उग्र आंदोलन की शुरुआत करेगी जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा एवम जिसकी सरकार स्वयं जिम्मेवार होगी।

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