पौंग में इस बार विदेशी मेहमानों की सुरक्षा रही ना के बराबर, खेती की आड़ में प्रवासी पक्षियों का शिकार

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झील किनारे जगह-जगह मिले पक्षियों के पंखों के ढेर

ज्वाली – अनिल छांगू

पौंग झील में इस बार प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा शून्य रही तथा पौंग झील किनारे खेती करने वालों ने खेती की आड़ में प्रवासी पक्षियों का धड़ल्ले से शिकार किया। झील किनारे जगह-जगह मिले प्रवासी पक्षियों के पंखों के ढेर, इसका साक्षात प्रमाण हैं।

कई जगहों पर तो प्रवासी पक्षी मृत भी मिले। झील किनारे खेती करने वाले लोगों ने जाल लगाए हुए हैं तथा खेतों में डोरियां बिछा रखी हैं, जिनमें प्रवासी पक्षी फंस जाते हैं और उनका शिकार कर लोए जाता है। कई जगहों पर पक्षी जालों में फंसे रह जाते हैं और तड़प-तड़प कर मर जाते हैं। कीटनाशक दवाइयां डालकर भी प्रवासी पक्षियों को मौत के घाट उतार दिया जाता है।

पर्यावरण प्रेमी मिलखी राम शर्मा, उजागर सिंह, कुलवंत सिंह इत्यादि ने कहा कि पौंग झील में आने वाले प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग का गठन करके जिम्मा सौंपा गया तथा झील किनारे अवैध खेती पर प्रतिबंध लगा दिया गया, ताकि प्रवासी पक्षी झील से बाहर निकलकर खुली जमीन में भी घूम सकें।

पौंग झील में आने वाले कुछेक प्रजाति के पक्षी झील में ही रहना पसंद करते हैं, जबकि अधिकतर पक्षी झील के बाहर खुली जमीन में घूमना पसंद करते हैं। जब से वन्य प्राणी विभाग ने झील किनारे हो रही खेती को सख्ती से बंद करवाया था, तब से झील में ज्यादा पक्षी आ रहे थे, लेकिन इस बार झील किनारे होने वाली खेती को बंद नहीं करवाया गया और धड़ल्ले से इनका शिकार हो गया, जिस कारण गणना में कम पक्षी होने की तुलना हुई।

डीएफओ रेजीनोड रॉयस्टोन ने क्या कहा

डीएफओ हमीरपुर रेजीनोड रॉयस्टोन ने कहा कि इस बार झील में कम पक्षी पहुंचे हैं, जिसका कारण तापमान है। विभाग ने प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं। उन्होंने कहा कि झील किनारे हुई खेती को काटने नहीं दिया जाएगा। झील किनारे के सभी रास्तों को खोला जाएगा व बाड़ इत्यादि हटा दिए जाएंगे।

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